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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक के दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए सरकार ने फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने का फ़ैसला किया है.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं कि संबंधित विभाग आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें. विद्यार्थियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए, सरकार की ओर से लिए जा रहे फ़ैसलों की कड़ी में ये एक अहम क़दम है. युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा.
प्रधानमंत्री का यह बयान प्रश्नपत्र लीक समेत विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है.
मंगलवार को एनडीए के सांसदों की बैठक को संबोधित करते हुए भी प्रधानमंत्री ने सांसदों से युवाओं तक पहुंचने और उनकी चिंताओं को सुनने की अपील की थी. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया था कि प्रश्नपत्र लीक जैसी अनियमितताओं में शामिल लोगों को सख़्त से सख़्त सज़ा मिलनी चाहिए.
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने प्रधानमंत्री की इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक्स पर लिखा, “धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा देना चाहिए.”
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राहुल गांधी का ‘152 पेपर लीक’ दावा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि 2014 में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के सत्ता में आने के बाद से अब तक 152 प्रश्नपत्र लीक हो चुके हैं, जिससे लगभग 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने कहा, “हम इतना जानते हैं कि पिछले एक दशक में 152 पेपर लीक हुए हैं. अगर हिसाब लगाएं तो औसतन हर महीने एक पेपर लीक हुआ है.”
इस पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने कहा कि मामले की जांच चल रही है और जांच पूरी होने के बाद सरकार पूरी सच्चाई देश के सामने रखेगी.
उन्होंने कहा, “यह जांच का विषय है और एक ज़िम्मेदार सरकार होने के नाते हम निश्चित रूप से इसकी जांच करेंगे और सच्चाई जनता तथा देश के सामने रखेंगे.”
तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने बुधवार को कथित नीट प्रश्न पत्र लीक के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे छात्रों से बातचीत शुरू करने में हुई देरी को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए.
उन्होंने एक्स पर लिखा, “लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना एक मौलिक अधिकार है. लेकिन असली सवाल यह है कि बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों से संवाद शुरू करने में इतनी देर क्यों की?”
उन्होंने पूछा, “जब तक आंदोलन गंभीर स्थिति में नहीं पहुंच गया, तब तक सार्थक बातचीत क्यों नहीं शुरू की गई? आख़िर सरकार किस बात का इंतज़ार कर रही थी?”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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