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पीएम मोदी की सरकार आख़िर यूपीआई पेमेंट पर चार्ज क्यों लगा रही है?

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Sep 18, 2026


यूपीआई

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इमेज कैप्शन, यूपीआई पेमेंट की लोकप्रियता भारत की मेट्रो सिटीज़ से लेकर गाँवों तक में है
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लोकसभा ने पिछले महीने उस बिल को मंज़ूरी दी थी, जो बैंकों और अन्य पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को देश के इंस्टैंट पेमेंट नेटवर्क के ज़रिए होने वाले लेनदेन पर शुल्क लगाने की अनुमति देता है.

इस बिल का मक़सद उस क़ानूनी प्रावधान को हटाना था, जो बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाने से रोकता थे.

एमडीआर एक छोटा शुल्क है. जब भी कोई ग्राहक डिजिटल भुगतान करता है, तो बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को दुकानदार एमडीआर देते हैं.

फ़िनटेक कंपनियां लंबे समय से एमडीआर की मांग कर रही थीं.

इन कंपनियों का तर्क रहा है कि लेनदेन की संख्या में तेज़ बढ़ोतरी के साथ बिना किसी मर्चेंट फीस के यूपीआई भुगतान को प्रोसेस करना आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं रह गया है.

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