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साल 2008 की बात है, केंद्र में यूपीए की मनमोहन सिंह सरकार अमेरिका के साथ सिविल न्यूक्लियर डील पर संसद में विश्वास मत का सामना कर रही थी.
फूलपुर संसदीय क्षेत्र से उस वक्त अतीक़ अहमद समाजवादी पार्टी से सांसद थे. समाजवादी पार्टी ने मनमोहन सरकार का समर्थन किया, लेकिन अतीक़ अहमद ने विरोध में मत दिया.
हालांकि इसका कारण स्पष्ट नहीं है, लेकिन कई मुक़दमों में घिरे होने की वजह से अतीक़ अहमद उस वक़्त शायद बीएसपी की प्रदेश सरकार को नाराज़ नहीं करना चाहते थे.
अतीक़ अहमद का मामला फिर चर्चा में क्यों?
अतीक़ अहमद पर हत्या, अपहरण, धमकी, जबरन वसूली, आर्म्स एक्ट और गैंगस्टर एक्ट से जुड़े मामले शामिल थे.
प्रमुख मामलों में तत्कालीन बीएसपी विधायक राजू पाल की हत्या, उसके गवाह उमेश पाल का अपहरण और नीलामी में हिस्सा लेने वाले लोगों को धमकाने, उनके अपहरण की कथित योजना से जुड़ा मामला शामिल था.
सीबीआई ने 2002 में आईपीसी और गैंगस्टर एक्ट के तहत एक और साल 2003 में आर्म्स एक्ट के तहत दो मामले भी दर्ज किए थे.
इसके करीब 15 साल बाद, 2023 में अतीक़ अहमद और उनके भाई अशरफ़ की हत्या हो गई. ये मामला प्रयागराज की अदालत में लंबित है.
अब, तीन साल बाद अतीक़ की हत्या का केस इसलिए सुर्ख़ियों में आ गया है, क्योंकि उनके छोटे बेटे आबान अहमद की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई है.
अतीक़ अहमद के सबसे छोटे बेटे 21 वर्षीय आबान अहमद की छह अगस्त 2026 को झांसी में एक सड़क दुर्घटना में मौत हुई.
वह चार अन्य लोगों के साथ कार से प्रयागराज से झांसी जा रहे थे. उन्हें झांसी जेल में बंद अपने बड़े भाई अली अहमद से मिलना था.
झांसी-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पूंछ थाना क्षेत्र में उनकी कार डिवाइडर से टकराकर पलट गई. हादसे में आबान और उनके साथ मौजूद सोनू की मौत हो गई, जबकि कार में सवार तीन अन्य लोग घायल हुए.
पुलिस की शुरुआती जांच में तेज़ रफ़्तार और कार का नियंत्रण से बाहर होना हादसे की संभावित वजह बताई गई.
अदालत में स्थिति
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अतीक़ अहमद और उनके भाई अशरफ़ की हत्या साल 2023 में हुई थी और ये मामला प्रयागराज की अदालत में लंबित है.
अतीक़ अहमद की हत्या का मामला प्रयागराज के शाहगंज थाने में दर्ज किया गया था.
इस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई चल रही है.
धूमनगंज के एसएचओ राजेश कुमार मौर्य की शिकायत के आधार पर शाहगंज पुलिस स्टेशन में तीन हमलावरों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई थी.
यह एफ़आईआर भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत दर्ज की गई है, इनमें 302 (हत्या), 307 (हत्या की कोशिश), 120-बी (साज़िश), 419 (किसी और का रूप धारण कर धोखाधड़ी), 420 (धोखाधड़ी), 467 (जाली दस्तावेज़ बनाना), 468 (धोखाधड़ी के लिए जाली दस्तावेज़ बनाना) शामिल हैं.
इसके साथ ही, आर्म्स एक्ट (3/25/27) और क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट (7 सीएलए) की धाराएं भी लगाई गई हैं.
जिन तीन अभियुक्तों को पुलिस ने गिरफ़्तार किया था, उनका नाम लवलेश तिवारी, अरुण मौर्य और मोहित सिंह उर्फ़ सनी सिंह है.
तीनों अभियुक्त अभी न्यायिक हिरासत में हैं.
अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत किया जा रहा है. इस मामले में गठित एसआईटी ने चार्जशीट में तकरीबन 200 गवाहों की सूची पेश की है.
अभियोजन पक्ष के मुताबिक़, एसआईटी ने तीनों हमलावरों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाख़िल की है. इस चार्जशीट में 2,056 पन्ने हैं. 2,000 पन्नों की केस डायरी और 56 पन्नों की चार्जशीट में सबूत और बयान शामिल हैं.
चार्जशीट के मुताबिक़, “अभियुक्तों का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और उन्होंने शोहरत और पैसा कमाने के लिए अतीक़ और अशरफ़ की हत्या की योजना बनाई थी. इन अभियुक्तों ने अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया था, जो उन्हें दिल्ली के आपराधिक गिरोहों से मिले थे.”
हालांकि अतीक़ के परिवार के क़रीबियों का कहना है कि इस हत्या के पीछे सोची-समझी साज़िश थी.
चार्जशीट में एसआईटी ने जिन चश्मदीदों को गवाह बनाया है, उनमें अतीक़ और अशरफ़ की सुरक्षा में तैनात 21 पुलिसकर्मी, 11 मीडियाकर्मी और अस्पताल के 16 से ज़्यादा कर्मचारी शामिल थे.
टीम ने कोर्ट में सबूत के तौर पर 70 सीसीटीवी फुटेज और सीसीटीवी कैमरों से 15 वीडियो रिकॉर्डिंग जमा की हैं.
इस केस में अभियोजन पक्ष के वकील मृत्युंजय तिवारी ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, “इस मामले में अभी पहली गवाही चल रही है, इसमें एफ़आईआर कराने वाले पुलिस अधिकारी की गवाही अदालत में दर्ज की जा रही है.”
इस मामले में तत्कालीन एसएचओ धूमनगंज राजेश कुमार मौर्य एफआईआर लिखाने वाले पुलिस अधिकारी हैं.
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हालांकि इसमें गवाहों की सूची लंबी है, लेकिन अभियोजन पक्ष का कहना है कि जो महत्वपूर्ण गवाह हैं, उनकी गवाही कराई जा रही है.
मृत्युंजय तिवारी ने बताया कि पुलिस की चार्जशीट में अभियुक्तों ने कहा है, “उन्होंने नाम कमाने के लिए अतीक़ और अशरफ़ की हत्या की है.”
वहीं, बचाव पक्ष की तरफ़ से गवाहों से जिरह की जा रही है. रत्नेश कुमार शुक्ला को अदालत की तरफ़ से अभियुक्त सनी सिंह का वकील नियुक्त किया गया है.
उन्होंने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, “हमारी तरफ़ से बहस की जा रही है, हमारा मानना है कि पुलिस अभिरक्षा में हत्या होना बड़ी बात है. इसलिए हम अभियुक्त की तरफ़ से जिरह कर रहे हैं. बाकी विस्तार से नहीं बताया जा सकता है.”
इस केस में लवलेश तिवारी यूपी के बांदा के रहने वाले हैं.
अख़बार द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक़, लवलेश तिवारी के दो भाई पुजारी का काम करते हैं. वहीं, लवलेश के ऊपर पहले से छोटे-मोटे केस चल रहे थे. इनमें एक मुक़दमा छेड़खानी का भी है.
वहीं, दूसरा अभियुक्त मोहित सिंह उर्फ़ सनी सिंह यूपी के हमीरपुर का रहने वाला है. वो भी एक केस के सिलसिले में अतीक़ की हत्या से पहले जेल जा चुका था.
तीसरे अभियुक्त का नाम अरुण मौर्य है. वो कासगंज का रहने वाला है, लेकिन कई साल से बाहर रह रहा था. उसके माता-पिता भी नहीं हैं.
अतीक़ की हत्या
अतीक़ अहमद और उनके भाई अशरफ़ की प्रयागराज में 15 अप्रैल 2023 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
उस वक्त दोनों भाई पुलिस हिरासत में थे. इस हिरासत के दौरान मेडिकल जांच के लिए ले जाते समय तीन हमलावरों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी.
तीनों हमलावर तब दूसरे पत्रकारों के बीच वहाँ मौजूद थे. ये हत्या तब हुई थी, जब पुलिस हिरासत में अतीक़ अहमद और उनके भाई अशरफ़ पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे.
इस हत्या में तुर्की की बनी ज़िगाना पिस्टल का भी इस्तेमाल हुआ था. ज़िगाना एक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल है, जिसे तुर्की की हथियार बनाने वाली कंपनी तिसास तैयार करती है.
भारत में इसकी बिक्री की अनुमति नहीं है. इस पिस्टल के कई मॉडल हैं, जिनकी मैगज़ीन क्षमता, वज़न और बैरल की लंबाई अलग-अलग होती है. हालांकि अतीक़ और अशरफ़ की हत्या में ज़िगाना के किस मॉडल का इस्तेमाल हुआ था और वह हथियार हमलावरों तक कहां से पहुंचा, इसकी पक्की जानकारी सामने नहीं आई थी.
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अतीक़ और उनके भाई अशरफ़ की हत्या जब हुई, तब दोनों भाई उमेश पाल की हत्या के मामले में पुलिस हिरासत में थे.
उमेश पाल साल 2005 में हुई यूपी के विधायक राजू पाल की हत्या के मामले में मुख्य गवाह थे. 24 फ़रवरी 2023 को प्रयागराज में उनकी हत्या कर दी गई थी.
इस मामले में पेशी के लिए अतीक़ अहमद को गुजरात की साबरमती जेल से भारी सुरक्षा के बीच प्रयागराज की नैनी जेल पहुंचाया गया था.
इस घटना से एक महीने पहले, मार्च 2023 में प्रयागराज की एमपी-एमएलए कोर्ट ने अतीक़ अहमद को दोषी क़रार देते हुए उमेश पाल अपहरण केस में उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी.
राजू पाल की हत्या
साल 2002 में अतीक़ अहमद ने इलाहाबाद (पश्चिम) सीट से पांचवीं बार विधानसभा चुनाव जीता. हालांकि, बाद में उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर साल 2004 में फूलपुर से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीता भी.
अब तक सब ठीक चल रहा था, लेकिन अतीक़ अहमद को पहला बड़ा झटका तब लगा, जब उनके और उनके भाई के ऊपर 2005 में राजू पाल की हत्या के मामले में एफ़आईआर दर्ज हो गई.
साल 2007 में यूपी की सत्ता बदली और मायावती सूबे की मुखिया बन गईं. सत्ता जाते ही सपा ने अतीक़ को पार्टी से बाहर कर दिया. उधर, मायावती की सरकार ने अतीक़ को मोस्ट वांटेड घोषित कर दिया.
अतीक़ अहमद ने साल 2008 में आत्मसमर्पण कर दिया और 2012 में रिहा हो गए. इसके बाद उन्होंने सपा के टिकट पर 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए.
अतीक़ अहमद को साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद साबरमती जेल भेजा गया था. इससे पहले वो यूपी की नैनी जेल में ही बंद थे. अतीक़ पर देवरिया के एक कारोबारी को जेल में बुलाकर धमकाने और अपहरण करने का केस दर्ज हुआ था.
साल 2005 में हुई राजू पाल की हत्या के मामले के मुख्य गवाह उमेश पाल की 24 फ़रवरी 2023 को दिनदहाड़े हत्या कर दी गई.
प्रयागराज पुलिस ने सीसीटीवी फ़ुटेज खंगालने के बाद इस हत्या में पूर्व सांसद और बाहुबली अतीक़ अहमद के बेटे असद, ‘बमबाज़’ गुड्डू मुस्लिम, ग़ुलाम और अरबाज़ का हाथ होने का दावा किया.
उमेश पाल 2005 में बीएसपी के विधायक राजू पाल की हत्या के बाद सुर्ख़ियों में आए थे, जब उन्हें राजू पाल की हत्या के मामले में मुख्य गवाह बनाया गया था.
अतीक़ अहमद का राजनीतिक सफ़र
अतीक़ अहमद राजनीति में भी सफलता की सीढ़ी चढ़े. उन्होंने पहली बार साल 1989 में निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत गए.
अतीक़ अहमद एक बार इलाहाबाद की फूलपुर सीट से सांसद भी बने.
यह भी दिलचस्प है कि कभी पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू ने इसी फूलपुर सीट का प्रतिनिधित्व किया था.
पहला चुनाव जीतने के बाद समाजवादी पार्टी से नज़दीकियां बढ़ीं और अतीक़ अहमद सपा में शामिल हो गए.
तीन साल सपा में रहने के बाद अतीक़ 1996 में अपना दल के साथ चले गए.
समाजवादी पार्टी से 2004 में सांसद बने, फिर 2014 में समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़े, लेकिन जीत नहीं पाए.
अतीक़ अहमद का परिवार
अतीक़ अहमद के परिवार में पत्नी शाइस्ता परवीन के अलावा कुल पांच बेटे हैं. सबसे बड़ा बेटा उमर अहमद लखनऊ के एक रियल एस्टेट कारोबारी मोहित जायसवाल के अपहरण के मामले में जेल में बंद है.
दूसरे बेटे अली अहमद पर फ़रवरी 2023 में हुए उमेश पाल हत्याकांड में शामिल होने का आरोप है. अली अहमद इस समय झांसी जेल में बंद है.
तीसरे बेटे असद अहमद की अप्रैल 2023 में झांसी में पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी. उमेश पाल हत्याकांड में असद अहमद नामज़द थे.
चौथे बेटे अहज़म अहमद और पांचवें बेटे आबान अहमद फ़रवरी 2023 में उमेश पाल हत्या मामले के बाद अभिभावकों की अनुपस्थिति के कारण लगभग सात महीने तक बाल संरक्षण गृह में रहे थे.
बाद में उनकी कस्टडी उनकी बुआ परवीन अहमद कुरैशी को सौंप दी गई थी, क्योंकि अतीक़ की पत्नी शाइस्ता परवीन पर कई केस दर्ज हैं और पुलिस के मुताबिक़ वो फ़रार चल रही हैं.
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