डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन द्वारा जारी विश्व प्रवासन रिपोर्ट 2026 के अनुसार, भारत ने फिर से वैश्विक प्रेषण चार्ट में अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा है। वर्ष 2024 में भारत को अपने 19 मिलियन प्रवासी भारतीयों से 137.67 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 11.5 लाख करोड़ रुपये) का रिकॉर्ड प्रेषण प्राप्त हुआ है।
प्रमुख आंकड़े (2024)
रैंक देश प्रेषण(अरब अमेरिकी डॉलर)
1 भारत 137.67
2 मेक्सिको 68.00
3 चीन 48.00
भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसने 100 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार किया है। यह उपलब्धि पिछले एक दशक में लगातार वृद्धि दर्शाती है, 2010 में जहां प्रेषण लगभग 53 बिलियन डॉलर था, वहीं 2024 में यह बढ़कर 137 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया।
भारत का प्रवासी समुदाय
भारत दुनिया का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय रखता है, जिसमें लगभग 1.9 करोड़ भारतीय विदेशों में रह रहे हैं। प्रमुख गंतव्य देशों में शामिल हैं…
- संयुक्त अरब अमीरात: 35.7 लाख भारतीय (विश्व का 5वां सबसे बड़ा प्रवासन गलियारा)
- संयुक्त राज्य अमेरिका: 29 लाख भारतीय (6ठा सबसे बड़ा गलियारा)
- सऊदी अरब: 25.9 लाख भारतीय
खाड़ी देशों में लाखों भारतीय निर्माण, सेवा और घरेलू क्षेत्रों में कार्यरत हैं, जबकि अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, इंजीनियरिंग और अनुसंधान जैसे उच्च-कुशल क्षेत्रों में भारतीय पेशेवरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। भारत छात्र प्रवासन का भी प्रमुख स्रोत देश बना हुआ है।
रिपोर्ट में मुख्य बातें
- आईओएम रिपोर्ट के अनुसार, भारत न केवल सबसे बड़ा प्रेषण प्राप्तकर्ता है बल्कि कुशल श्रमिकों और छात्रों का सबसे बड़ा स्रोत देश भी है।
- अमेरिका, यूएई, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में अच्छी कमाई वाले भारतीय पेशेवरों ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई है।
- मेक्सिको-यूएस प्रवासन गलियारा (लगभग 1.1 करोड़) अभी भी दुनिया का सबसे बड़ा गलियारा है, लेकिन भारतीय गलियारे तेजी से मजबूत हो रहे हैं।
यह प्रेषण न केवल भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाता है बल्कि देश के कई परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।