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प्राइवेट अस्पतालों में C-section बना ‘न्यू नॉर्मल’, जम्मू-कश्मीर में 90 और तेलंगाना में 84 सिजेरियन डिलीवरी

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May 30, 2026


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के प्राइवेट अस्पतालों में अब सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए बच्चों का जन्म होना नॉर्मल हो गया है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के नए आंकड़ों के अनुसार, देश के प्राइवेट अस्पतालों में होने वाली डिलीवरी में से 54% से अधिक मामले सिजेरियन के पाए गए हैं।

इस मामले में कुछ राज्य बहुत आगे हैं। पश्चिम बंगाल के प्राइवेट अस्पतालों में यह आंकड़ा सबसे ज्यादा चिंताजनक है, जहां 87.7% बच्चों का जन्म ऑपरेशन से हुआ है। वहीं, तेलंगाना में 84% और आंध्र प्रदेश में 66% प्राइवेट डिलीवरी सिजेरियन दर्ज की गई हैं।

आधे से अधिक जन्म सिजेरियन के जरिए

देश के 27 राज्यों और दो बड़े केंद्र शासित प्रदेशों दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में से 18 राज्यों में स्थिति यह है कि प्राइवेट अस्पतालों में होने वाले आधे से अधिक जन्म सिजेरियन के जरिए ही हो रहे हैं। अगर सरकारी और प्राइवेट दोनों अस्पतालों को मिला दिया जाए, तो भी कुछ राज्यों में कुल सिजेरियन का आंकड़ा बहुत ज्यादा है।

तेलंगाना में कुल डिलीवरी का 62% से ज्यादा हिस्सा सिजेरियन है, जबकि आंध्र प्रदेश में यह 52% से अधिक और पश्चिम बंगाल में 44.5% है। जम्मू-कश्मीर की कहानी और भी अलग है, जहां प्राइवेट अस्पतालों में सिजेरियन का रेट 90% तक पहुंच गया है और सरकारी अस्पतालों में भी यह लगभग 49% है। यही वजह है कि जम्मू-कश्मीर में होने वाली डिलीवरी में से आधी से ज्यादा सिजेरियन होती हैं।

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सालों-साल लगातार बढ़ रहा है आंकड़ा

भारत में पिछले दो दशकों में सिजेरियन जन्मों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। साल 2004-05 में देश में सिर्फ 8.5% सिजेरियन डिलीवरी होती थीं, जो 2015-16 में बढ़कर 17.2% हो गईं और फिर 2019-21 में यह आंकड़ा 21.5% तक पहुंच गया। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अब देश में पैदा होने वाले चार में से एक से अधिक बच्चे (27.2%) सिजेरियन के जरिए दुनिया में आ रहे हैं।

राहत की बात यह है कि सरकारी अस्पतालों में यह बढ़ोतरी काफी धीमी रही है। साल 2005-06 में सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन रेट 15.2% था, जो अब मामूली बढ़त के साथ 16.9% पर पहुंचा है। हालांकि, दक्षिण भारत के राज्यों जैसे तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और तेलंगाना के सरकारी अस्पतालों में भी 34% से 48% तक सिजेरियन डिलीवरी हो रही हैं।

असम और ओडिशा के प्राइवेट अस्पतालों में भले ही सिजेरियन का आंकड़ा बहुत ऊंचा क्रमशः 81.4% और 76.8% है, लेकिन इन राज्यों में कुल मिलाकर सिजेरियन की संख्या काफी कम है। इसका कारण यह है कि इन राज्यों में तीन-चौथाई से अधिक महिलाएं डिलीवरी के लिए सरकारी अस्पतालों में जाती हैं, जहां सिजेरियन का रेट काफी कम है। असम के सरकारी अस्पतालों में यह रेट केवल 18% और ओडिशा में करीब 22% है, जिसके कारण इन राज्यों का कुल औसत नियंत्रित रहता है।

निजी अस्पतालों में कुल जन्मों में सी-सेक्शन का प्रतिशत

राज्य / क्षेत्र शहरी % ग्रामीण % कुल %
जम्मू-कश्मीर (J&K) 92.5 88.5 90
पश्चिम बंगाल 86.8 88.1 87.7
तेलंगाना 84.5 83.9
असम 81.4
त्रिपुरा 93
राजस्थान 49.4 29.1 35
मिजोरम 35.2
नगालैंड 32.5
भारत (औसत) 57.4 52.2 54.1

स्रोत: NFHS-6, राष्ट्रीय और राज्य फैक्टशीट

बिहार-झारखंड में बहुत कम सिजेरियन

जहां देश का एक बड़ा हिस्सा जरूरत से ज्यादा सिजेरियन ऑपरेशन की समस्या से जूझ रहा है, वहीं बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में कहानी बिल्कुल उल्टी है। बिहार में कुल सिजेरियन डिलीवरी सिर्फ 13% हैं, जबकि झारखंड और मध्य प्रदेश में यह लगभग 16% है। इसका मुख्य कारण यह है कि इन राज्यों के सरकारी अस्पतालों में ऑपरेशन की बेहद कम सुविधा उपलब्ध है।

बिहार के सरकारी अस्पतालों में सिर्फ 2.7% सिजेरियन होते हैं, झारखंड में 6.1% और मध्य प्रदेश में 10% से कुछ ज्यादा हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कोई अच्छी बात नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि इन राज्यों में गरीब महिलाओं को आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिसकी वजह से वहां मातृ मृत्यु दर भी ज्यादा है। राजस्थान की स्थिति भी कुछ ऐसी ही नजर आती है।

क्या है अन्य देशों का हाल?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, किसी भी देश या समाज में 10% से 15% सिजेरियन रेट को ही स्वास्थ्य के लिहाज से सही माना जाता है। लेकिन आज दुनिया के अधिकांश देश इस सीमा को पार कर चुके हैं। ब्राजील में 52% से ज्यादा डिलीवरी सिजेरियन हैं, जबकि यूके में 45% और यूएस में 32% से ज्यादा सिजेरियन होते हैं।

इसके विपरीत, स्वीडन (19%) और नॉर्वे (16%) जैसे देशों में सिजेरियन रेट काफी नियंत्रित है। इन देशों में बिना वजह के ऑपरेशनों को रोकने पर बहुत ज्यादा जोर दिया जाता है और गर्भावस्था व डिलीवरी की देखरेख मुख्य रूप से मिडवाइव्स (दाइयों/नर्सों) द्वारा की जाती है। इसी तरह फ्रांस में भी यह आंकड़ा करीब 21% पर बना हुआ है।

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