डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बेंगलुरु का ट्रैफिक जाम वैसे ही बदनाम है, लेकिन जब इसमें किसी वीआईपी काफिले के लिए बंद की गई सड़क का तड़का लग जाए, तो आम जनता की मुश्किलें दोगुनी हो जाती हैं। भारत की इस सिलिकॉन वैली में फंसे एक परेशान नागरिक ने इस वीआईपी संस्कृति के खिलाफ विरोध जताने के लिए गांधीवादी तरीका अपनाया।
अपनी गर्भवती पत्नी के साथ यात्रा कर रहे इस व्यक्ति का धैर्य तब जवाब दे गया, जब कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत के काफिले को निकालने के लिए ओल्ड एयरपोर्ट रोड पर ट्रैफिक को काफी देर तक रोक दिया गया।
गुस्से और लाचारी में वह शख्स अपनी गाड़ी से उतरा और सीधे सड़क के बीचों-बीच बैठ गया। सड़क से हटने से साफ इनकार करते हुए इस अनजान शख्स का तर्क था कि एक आम नागरिक के समय की कीमत भी किसी राजनेता के समय जितनी ही महत्वपूर्ण है।
ट्रैफिक इंस्पेक्टर और शख्स के बीच तीखी बहस
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में ट्रैफिक पुलिसकर्मी और उस आक्रोशित नागरिक के बीच तीखी बहस साफ देखी जा सकती है। जब उस व्यक्ति ने पुलिसकर्मी से कहा कि उसकी पत्नी गर्भवती है और उन्हें भी अपने जरूरी काम से जाना है, तो ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने उसे टोकते हुए सड़क से हटकर एक तरफ खड़े होने की हिदायत दी।
इस पर उस शख्स ने पलटकर सवाल किया कि उसकी पत्नी के प्रेग्नेंट होने के बावजूद सिर्फ इसलिए सिग्नल क्यों बंद रखा गया है कि वहां से गवर्नर का वीआईपी काफिला गुजरने वाला है, और क्या आम जनता की कोई अहमियत नहीं है। पुलिसकर्मी ने उसे समझाने और शांत करने के लहजे में कहा कि वह खुद भी एक वीआईपी है, इसलिए अब उसे सड़क से उठ जाना चाहिए।
इसके बाद जब पुलिसकर्मी ने सख्ती दिखाते हुए उससे बार-बार पूछा कि क्या वह सड़क से उठ रहा है या नहीं, तो उस शख्स ने पूरी दृढ़ता के साथ हर बार ‘नहीं’ में जवाब देते हुए वहां से हटने से साफ इनकार कर दिया।
वीआईपी कल्चर के खिलाफ लोगों में आक्रोश
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में ट्रैफिक पुलिसकर्मी और उस व्यक्ति के बीच हुई तीखी बहस हो गई। हालांकि, राज्यपाल का काफिला आखिरकार भीड़भाड़ वाली सड़क के किनारे से गुजर गया, लेकिन यह पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है कि वह शख्स वहां से कैसे और कब हटा।
इस घटना ने देश में वीआईपी कल्चर के खिलाफ आम जनता के बीच सुलगते गुस्से को एक बार फिर सामने ला दिया है। दिलचस्प बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पिछले महीने ही इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया था।
प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों और अधिकारियों से आधिकारिक प्रोटोकॉल के दौरान सादगी और किफायत बरतने का आग्रह किया था। उन्होंने सत्ता के इस तरह के दिखावे के बजाय सादगी और कार्यकुशलता पर जोर देने की बात कही थी।
गवर्नेंस में फिजूलखर्ची और जनता को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए, प्रधानमंत्री ने अपने खुद के काफिले के आकार में 50% की कटौती करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही, अनावश्यक खर्चों और प्रदूषण को रोकने के लिए काफिले में इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करने के निर्देश भी दिए थे।