डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान इस समय ब्रिटेन की एक महत्वपूर्ण और ‘ऐतिहासिक’ यात्रा पर हैं। किसी भारतीय सीडीएस की यह पहली आधिकारिक ब्रिटेन यात्रा है, जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना और भविष्य के युद्धों की बदलती प्रकृति पर रणनीति तैयार करना है।
उन्होंने कहा कि भविष्य की रक्षा तैयारियों में उन्नत तकनीक और बहु-क्षेत्रीय एकीकरण की भूमिका सबसे अहम होगी। रक्षा औद्योगिक रोडमैप और तकनीकी सहयोग जनरल चौहान ने लंदन में ब्रिटेन के रक्षा मंत्री ल्यूक पोलार्ड और हिंद-प्रशांत राज्य मंत्री सीमा मल्होत्रा के साथ उच्च स्तरीय बैठकें कीं।
इन वार्ताओं का केंद्र ‘भारत-ब्रिटेन रक्षा औद्योगिक रोडमैप’ और ‘विजन 2035’ के तहत द्विपक्षीय सुरक्षा पहलों को आगे बढ़ाना रहा। मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ के अनुसार, दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में तकनीकी नवाचार, औद्योगिक सहयोग और सूचना लचीलेपन पर विशेष जोर दिया है।
साइबर, इंटेलिजेंस और अंतरिक्ष क्षेत्र में साझेदारी युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए दोनों पक्षों ने पारंपरिक सहयोग से आगे बढ़कर साइबर, इंटेलिजेंस और स्पेस जैसे आधुनिक डोमेन में विशेषज्ञता साझा करने पर सहमति जताई। ए
यर चीफ मार्शल सर रिचर्ड नाइटन के साथ हुई चर्चा में संयुक्त युद्धाभ्यास और वैश्विक सुरक्षा स्थिरता को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। ¨कग्स कालेज लंदन में आयोजित एक राउंडटेबल बैठक में जनरल चौहान ने भारतीय सैन्य परिवर्तन की चुनौतियों और अवसरों पर भी प्रकाश डाला। उनकी यह यात्रा भारत और ब्रिटेन के बीच एक मजबूत, भविष्योन्मुखी रणनीतिक साझेदारी को और प्रगाढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।