बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने वाले नाहिद इस्लाम ने भारत में प्रदर्शन कर रहे युवाओं के समर्थन में बयान जारी किया है। उन्होंने चुनावी जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की मांग कर रहे भारतीय युवाओं के साथ एकजुटता जताई।
उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों, आंदोलन के आयोजकों और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताई। साथ ही, इंटरनेट सेवाओं पर रोक और जंतर-मंतर पर लगाई गई पाबंदियों को बुनियादी स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया। अपने बयान में उन्होंने भारतीय अधिकारियों से हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करने की अपील की।
नाहिद इस्लाम ने भारतीय युवाओं के समर्थन में क्या कहा?
नाहिद इस्लाम ने कहा, हम चुनावी जवाबदेही की मांग करने और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने वाले भारत के युवाओं के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। नई दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों, आयोजकों और पत्रकारों को हाल ही में हिरासत में लिया जाना, इंटरनेट सेवाओं पर रोक और जंतर-मंतर पर लगाई गई पाबंदियां सीधे तौर पर बुनियादी स्वतंत्रताओं के लिए खतरा हैं। चुनाव की निष्पक्षता और संस्थानों की स्वतंत्रता से जुड़े सवालों के पारदर्शी जवाब दिए जाने चाहिए, न कि बैरिकेड लगाकर और सेंसरशिप के जरिए उन्हें दबाया जाना चाहिए।’
उन्होंने आगे कहा, यह संघर्ष केवल आपका नहीं है। ढाका से हम आपके साथ दोस्तों की तरह खड़े हैं। हम जवाबदेह सत्ता, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मानवीय गरिमा की साझा मांग से जुड़े हैं।
नाहिद ने आगे कहा, हम इस संघर्ष को अच्छी तरह समझते हैं, क्योंकि हम खुद इससे गुजर चुके हैं। जुलाई 2024 में सरकारी नौकरियों में भर्ती के कोटे के खिलाफ छात्रों के नेतृत्व में शुरू हुआ हमारा आंदोलन 15 साल के सत्तावादी शासन के खिलाफ देशव्यापी विद्रोह में बदल गया’।
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‘सरकार ने जवाब में असली गोलियों का इस्तेमाल किया। बाद में संयुक्त राष्ट्र ने अनुमान लगाया कि इस विद्रोह और इसे दबाने की कार्रवाई के दौरान 1,400 लोगों तक की मौत हुई थी। हम अपने आंदोलन के दौरान भारतीय छात्रों, लेखकों और स्वतंत्र आवाजों की ओर से दिखाई गई एकजुटता को गहराई से याद करते हैं और उसका सम्मान करते हैं’।
शाहीन बाग आंदोलन का क्यों किया जिक्र?
नाहिद इस्लाम ने भारत में लोकतांत्रिक विरोध की परंपरा की सराहना की। उन्होंने कहा, हम भारत में लोकतांत्रिक प्रतिरोध की समृद्ध परंपराओं को पहचानते हैं। शाहीन बाग की महिलाओं ने दिल्ली की सर्दियों में समान नागरिकता के अधिकार की रक्षा की। वहीं, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) और जादवपुर विश्वविद्यालय में कई पीढ़ियों के छात्रों ने संगठित विरोध की परंपरा को बनाए रखा है। ये लोकतंत्र की अनमोल विरासत हैं।
उन्होंने कहा, आज हम एक बार फिर भारतीय युवतियों का साहस सड़कों पर देख रहे हैं। बांग्लादेश में भी जुलाई क्रांति के दौरान महिलाएं सबसे आगे थीं। उनके साहस और बलिदान ने हमारी जीत सुनिश्चित करने में मदद की।
हिंदुत्व और अल्पसंख्यकों पर क्या कहा?
नाहिद इस्लाम ने कहा कि दक्षिण एशिया का भविष्य हिंदुत्व के नाम पर बहुसंख्यकों के दबदबे, फासीवाद और किसी एक धर्म को दूसरों से ऊपर रखने की सोच से तय नहीं होना चाहिए। हम भारत में ठीक उसी तरह सत्तावाद, सांप्रदायिक नफरत और राजनीतिक असहिष्णुता को खारिज करते हैं, जैसे हम बांग्लादेश में करते हैं।
उन्होंने कहा, हमारा साझा भविष्य सांप्रदायिक सद्भाव और सामाजिक न्याय पर आधारित होना चाहिए। इसमें धर्म, जाति, लिंग या वर्ग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। कोई भी समाज वास्तव में लोकतांत्रिक नहीं हो सकता, जहां अल्पसंख्यक डर में रहते हों, असहमति जताने को अपराध बना दिया जाता हो और नागरिकता किसी की पहचान पर निर्भर करती हो।
भारतीय अधिकारियों से क्या अपील की?
नाहिद इस्लाम ने भारतीय अधिकारियों से प्रदर्शनकारियों के अधिकारों का सम्मान करने की मांग की। उन्होंने कहा, हम भारतीय अधिकारियों से अपील करते हैं कि वे शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के अधिकार का सम्मान करें। प्रदर्शन के आयोजकों को कहां रखा गया है और उन्हें किस कानूनी आधार पर हिरासत में लिया गया है, इसकी जानकारी सार्वजनिक करें। अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने के कारण हिरासत में लिए गए लोगों को तुरंत रिहा करें। यह भी सुनिश्चित करें कि पत्रकार बिना किसी डर के खबरें दे सकें और उनके उपकरण जब्त न किए जाएं।
शरजील इमाम और उमर खालिद का जिक्र कर क्या बोले?
नाहिद इस्लाम ने कहा, आज कई युवा नेताओं को अन्यायपूर्ण तरीके से हिरासत में रखा गया है। शरजील इमाम और उमर खालिद वर्षों से बिना मुकदमे के जेल में बंद हैं। हम भारत के सभी युवा प्रदर्शनकारियों और अंतरात्मा की आवाज पर कैद किए गए लोगों को अपना साथी मानते हैं। उनका साहस पूरे दक्षिण एशिया के युवाओं को प्रेरित करता है।
भारत-बांग्लादेश के बीच किन मुद्दों को बताया अहम?
दोनों देशों के संबंधों और साझा चुनौतियों पर नाहिद इस्लाम ने कहा, हमारे संघर्ष एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इनमें सीमा पर हत्याओं, पानी के बंटवारे, पर्यावरण की सुरक्षा और राष्ट्रीय संप्रभुता जैसे अनसुलझे मुद्दे भी शामिल हैं। हम ऐसा दक्षिण एशिया चाहते हैं, जहां देश एक-दूसरे के साथ बराबरी का व्यवहार करें, सरकारें जवाबदेह रहें और राष्ट्रीय संप्रभुता को कभी किसी पर दबदबा बनाने का बहाना न बनाया जाए।
भारतीय युवाओं से क्या अपील की?
उन्होंने कहा, भारत के लोकतांत्रिक लोगों से कहना चाहता हूं कि ढाका से और हमारे जुलाई आंदोलन की अधूरी लोकतांत्रिक आकांक्षाओं के साथ हम आपके साथ खड़े हैं। मजबूती से डटे रहें, एक-दूसरे की रक्षा करें, सांप्रदायिक नफरत को खारिज करें और दक्षिण एशिया के भविष्य को फासीवाद और विभाजन के हवाले करने से इनकार करें।