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भारतीय शेयर बाज़ारों में गिरावट के पीछे क्या ये अमेरिकी वजह है? जानें बॉन्ड यील्ड का ‘खेल’

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Oct 4, 2026


अमेरिकी बॉन्ड यील्ड

इमेज कैप्शन, अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड में बढ़ोतरी का असर पूरी दुनिया के शेयर बाज़ारों और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है

    • Author, दीपक मंडल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

ईरान युद्ध की वजह से दुनिया भर के बाज़ारों में तेल की बढ़ती क़ीमतों के बीच अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में रिकॉर्ड बढ़ोतरी पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है.

यूएस ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड पिछले सप्ताह मंगलवार को 25 साल की रिकॉर्ड बढ़ोतरी के साथ 5.56 फ़ीसदी पर पहुंच गई. दस साल की बॉन्ड यील्ड 5.22 फ़ीसदी और दो साल की बॉन्ड यील्ड 4.86 फ़ीसदी पर पहुंच गईं.

बॉन्ड यील्ड सरकार की ओर से एक ख़ास अवधि के लिए कर्ज पर निवेशक को दी जाने वाली रिटर्न होती है. बॉन्डहोल्डर को सालाना दी जाने वाली ब्याज दर कूपन रेट कहलाती है.

अमेरिकी सरकार के लिए बॉन्ड यील्ड बढ़ाकर लंबी अवधि के लिए कर्ज़ जुटाना राहत की बात हो सकती है लेकिन अमेरिका के निवेशकों, कारोबारियों समेत दुनिया के दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था, निवेशकों, शेयर बाज़ारों और कारोबारियों के लिए ये चिंता की बात है.

दो युद्धों की वजह से पूरी दुनिया महंगाई की मार झेल रही है (सांकेतिक तस्वीर)

इमेज कैप्शन, दो युद्धों की वजह से पूरी दुनिया महंगाई की मार झेल रही है (सांकेतिक तस्वीर)

अगर अमेरिका में बॉन्ड यील्ड ऊंची है तो जाहिर है सारी दुनिया के निवेशक इसमें निवेश करने के लिए खिंचे चले आएंगे. यानी दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं से निवेशक पैसा निकालकर यहां लगाने लगेंगे.

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