पीटीआई, नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय यूनियन (ईयू) इस साल के अंत तक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर करेंगे। इस बात का एलान ईयू की शीर्ष नेता अर्सला वान डेर लेयेन ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ बातचीत के बाद किया।
जी-7 समिट के दौरान हुई बैठक में दोनों पक्षों ने सुरक्षा और रक्षा समन्वय बढ़ाने का भी फैसला किया। बैठक में यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा भी शामिल हुए। इस समझौते को सभी समझौतों की जननी भी कहा जा रहा है, क्योंकि इससे दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक साझेदारी क्षेत्रों में से एक का निर्माण होगा।
यह समझौता वस्तुओं, सेवाओं और डिजिटल बिजनेस को कवर करेगा। इसके लागू होने से करीब दो अरब लोगों और वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक बड़े हिस्से को फायदा मिलेगा। साथ ही व्यापार, निवेश और टेक्नोलॉजी सहयोग के नए अवसर बनेंगे।
बैठक के दौरान यूरोपीय नेताओं ने कहा कि समझौते को अंतिम रूप देने के बाद अब इसे लागू करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है और साल के अंत तक इस पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।
अर्सला ने कहा कि दोनों पक्ष समझौते को अंतिम रूप देने के बाद अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि एफटीए के अलावा निवेश समझौते पर भी तेजी से काम आगे बढ़ाया जाएगा।
भारत और ईयू ने 27 जनवरी को पीएम मोदी और ईयू के शीर्ष नेताओं के बीच बैठक के बाद एफटीए के लिए वार्ता पूरी होने का एलान किया था।
ईयू का अनुमान है कि इस डील से यूरोपीय निर्यातकों को सालाना टैरिफ में चार अरब डालर की बचत होगी। एफटीए के तहत ईयू को होने वाला 99 प्रतिशत भारतीय निर्यात पर टैरिफ कम हो जाएगा।