भारत और चीन के बीच संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिशों के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने सोमवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी से कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे की मुख्य चिंताओं से जुड़े मुद्दों के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। डोभाल ने नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के सुरक्षा अधिकारियों के सम्मेलन के इतर वांग यी के साथ बातचीत की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को कहा कि एनएसए ने इस बात पर जोर दिया कि स्थिर, पूर्वानुमान योग्य और रचनात्मक द्विपक्षीय संबंध दोनों पक्षों के बीच विश्वास बढ़ाने और आपसी समझ को गहरा करने में योगदान देंगे।
डोभाल ने चीन को दिया क्या संदेश?
रणधीर जायसवाल ने कहा, “एनएसए ने इस बात के महत्व पर भी जोर दिया कि एक-दूसरे की मुख्य चिंताओं से जुड़े मुद्दों के प्रति लगातार संवेदनशीलता दिखाई जाए।” हालांकि, जायसवाल ने इन मुख्य चिंताओं से जुड़े मुद्दों का कोई विवरण नहीं दिया। उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण आपसी संवेदनशीलता, आपसी हितों और आपसी सम्मान की हमारी व्यापक नीति के अनुरूप है।
बैठक में दोनों पक्षों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की समग्र स्थिति की भी समीक्षा की। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब दोनों देश पूर्वी लद्दाख में चार साल से अधिक समय तक चले सैन्य गतिरोध के बाद संबंधों को फिर से सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
बैठक पर क्या बोला चीन?
चीन के राजदूत शू फेइहोंग के अनुसार, वांग यी ने बैठक में कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाली दो अर्थव्यवस्थाओं के रूप में चीन और भारत को न केवल द्विपक्षीय संबंधों को दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए, बल्कि वैश्विक नजरिए से भी सहयोग को आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा, “दोनों पक्षों को दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमति को लागू करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, सहयोग के जरिए अपने-अपने विकास और पुनरुत्थान को बढ़ावा देना चाहिए। वैश्विक दक्षिण के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को तेज करना चाहिए।”
शू फेइहोंग ने सोशल मीडिया पर कहा कि वांग यी ने कहा, “एक-दूसरे के मूल हितों का सम्मान करना, संवेदनशील मुद्दों को उचित तरीके से संभालना और चीन-भारत सीमा मुद्दे को उचित स्थान पर रखना जरूरी है, ताकि इसका असर द्विपक्षीय संबंधों की समग्र स्थिति पर न पड़े।” उन्होंने कहा, “दोनों पक्षों को समाज के सभी वर्गों में सही समझ विकसित करने के लिए भी सक्रिय रूप से प्रयास करने चाहिए और द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के लिए मजबूत जनमत और सामाजिक आधार तैयार करना चाहिए।”
शू फेइहोंग के अनुसार, चीन ने ब्रिक्स की मौजूदा अध्यक्षता के दौरान भारत की भूमिका का समर्थन किया है और वह ब्रिक्स तंत्र के विकास और विस्तार को आगे बढ़ाने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।