डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मंडल ने भारत में संरचनात्मक सुधारों, निजी क्षेत्र की भागीदारी और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए 1.5 अरब डॉलर के वित्तपोषण को मंजूरी दे दी है। यह सहायता ‘बूस्टिंग जाब क्रिएशन इन द प्राइवेट सेक्टर डेवलपमेंट पालिसी फाइनेंसिंग’ कार्यक्रम के तहत दी जाएगी।
विश्व बैंक ने सोमवार को कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य निजी क्षेत्र के नेतृत्व में रोजगार के अवसर बढ़ाना और आर्थिक वृद्धि को गति देना है। इसके तहत अगले दो दशकों में कार्यबल में शामिल होने वाले करीब 11 करोड़ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार करने वाले सुधारों को समर्थन दिया जाएगा।
कार्यक्रम में उद्यमिता की राह में आने वाली बाधाएं कम करने, विशेषकर महिलाओं की श्रम बाजार में भागीदारी बढ़ाने, व्यापार और निवेश प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा कंपनियों के लिए पूंजी तक पहुंच बेहतर करने पर जोर दिया गया है।
विश्व बैंक के अनुसार, यह पहल कर प्रणाली के सरलीकरण, व्यापार एकीकरण, नियामकीय सुधारों और कारोबार सुगमता बढ़ाने के लिए हाल के वर्षों में किए गए कदमों को आगे बढ़ाएगी।सरकार ने नवंबर 2025 में 29 श्रम कानूनों को मिलाकर चार श्रम संहिताएं लागू की थीं।
इनका उद्देश्य अनुपालन प्रक्रियाओं को आसान बनाना, पुराने प्रविधानों को आधुनिक बनाना और कामगारों के अधिकारों की सुरक्षा के साथ उद्योगों के लिए अधिक प्रभावी ढांचा तैयार करना है।सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में रोजगार 2017-18 के 45.2 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 60.4 करोड़ हो गया।
इस अवधि में 15 करोड़ से अधिक रोजगार जुड़े, बेरोजगारी दर छह प्रतिशत से घटकर 3.2 प्रतिशत रही और करीब 90 लाख महिलाएं नियमित वेतन वाले रोजगार से जुड़ीं।विश्व बैंक ने कहा कि यह वित्तपोषण वित्त वर्ष 2026-31 के लिए भारत के साथ उसकी कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क के अनुरूप है।
यह वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को भी समर्थन देगा। दक्षिण एशिया के लिए विश्व बैंक के उपाध्यक्ष जोहान्स जट ने कहा कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत निजी पूंजी आकर्षित करने और रोजगार बढ़ाने के लिए सुधारों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।