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मच्छर, हाथी, मांकड़…गुजरात में ऐसे सरनेम कहाँ से आए?

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Oct 13, 2026


गुजरात के भुज इलाके की पारंपरिक वेशभूषा में स्थानीय लोग

इमेज कैप्शन, गुजरात के भुज इलाके की पारंपरिक वेशभूषा में स्थानीय लोग

कुछ दिन पहले फ़्लाईदुबई एयरलाइन के विमान में हुई एक घटना के बाद गुजरात मूल के कैप्टन स्मित मच्छर काफ़ी चर्चा में आए.

उनकी ‘बहादुरी’ के साथ-साथ सोशल मीडिया पर उनके सरनेम ‘मच्छर’ की भी चर्चा हुई.

वैसे गुजरात में ऐसे कई सरनेम मिलते हैं, जो जानवरों या कीड़े-मकोड़ों के नाम पर हैं. राज्य में घोड़ा, मच्छर, हाथी, वाघ, मांकड़, पोपट, बिच्छू और शियाल जैसे सरनेम काफ़ी आम हैं.

इनके अलावा कीड़ी, चकली, तितोड़ी, बकरी, मकोड़ी और तीतर जैसे सरनेम भी मिलते हैं. लेकिन सवाल यह है कि जानवरों और कीड़े-मकोड़ों के नाम वाले ये सरनेम कहां से आए और समाज में कैसे प्रचलित हुए?

इन गुजराती सरनेम की जड़ें कहां हैं?

अमरेली में बैठे कुछ बुजु़र्ग

इमेज कैप्शन, गुजरात के अमरेली के एक गांव के कुछ बुजु़ुर्ग

समाजशास्त्र में एक मान्यता है, जिसे ‘टोटेमिज़्म’ कहा जाता है. पुराने समय में लोग अलग-अलग समूहों और क़बीलों में रहते थे. उस समय हर समूह अपनी पहचान के लिए किसी पक्षी या जानवर का निशान रखता था. अंग्रेज़ी में इसे ‘टोटेम’ कहते हैं.

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