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राहुल गांधी का सुप्रीम कोर्ट तक मार्च, क्या हैं इस राजनीति के मायने

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Oct 13, 2026


12 अक्तूबर 2026: राहुल गांधी (बीच में) प्रदर्शनकारियों के एक मार्च का नेतृत्व कर रहे थे. वे भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे. यह मार्च सुप्रीम कोर्ट तक गया ताकि चुनाव आयोग की 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (एसआईआर) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका सौंपी जा सके.

इमेज कैप्शन, याचिका सौंपी गई.दिल्ली में राहुल गांधी (बीच में) प्रदर्शनकारियों के मार्च का नेतृत्व करते हुए. मार्च के बाद सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर प्रक्रिया से जुड़ी याचिका सौंपी गई.

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे.

इमेज कैप्शन, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत से मिलने का समय मांगा था. लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने मुलाक़ात से इनकार कर दिया.

राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर कहा कि वे उनसे मिलकर चुनाव आयोग और कथित ‘वोट चोरी’ समेत कई मुद्दों पर अपनी चिंताएं उनके सामने रखना चाहते हैं.

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जिन मुद्दों को लेकर मुलाक़ात का अनुरोध किया गया है, उनसे जुड़े मामले पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं. ऐसे मामलों पर अलग से बैठक करना न्यायिक मर्यादा के अनुकूल नहीं होगा.

तो सवाल यह है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता का मुख्य न्यायाधीश से मिलने का समय मांगना क्या एक सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा था या इसे राजनीतिक क़दम के तौर पर देखा जाना चाहिए?

क़ानून क्या कहता है?

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जिन मुद्दों को लेकर मुलाक़ात का अनुरोध किया गया है, उनसे जुड़े मामले पहले से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं.

इमेज कैप्शन, मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जिन मुद्दों को लेकर मुलाक़ात का अनुरोध किया गया है, उनसे जुड़े मामले पहले से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं

वरिष्ठ क़ानूनी विश्लेषक फ़ैज़ान मुस्तफ़ा ने बीबीसी हिंदी से बातचीत में कहा, “मुलाक़ात का समय मांगने के बाद विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने वीडियो में कहा कि हम किसी राजनीतिक पार्टी की हैसियत से नहीं, बल्कि नागरिक के तौर पर मिलेंगे. इसके बावजूद मुख्य न्यायाधीश ने जिन बातों को आधार मानकर मिलने से इनकार किया है, वह फ़ैसला बिल्कुल सही है.”

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