जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के मूल्यांकन में गड़बड़ी को लेकर उठ रहे सवालों के बीच शिक्षा मंत्रालय से जुड़ी संसदीय समिति ने अब सीबीएसई के प्रमुख को तलब किया है। समिति ने सीबीएसई अधिकारियों के साथ शिक्षा मंत्रालय और एनटीए के शीर्ष अधिकारियों को एक व दो जून को उपस्थित होने के निर्देश दिए है।
दो दिन की इस बैठक में सीबीएसई में मूल्यांकन व पुनर्मूल्यांकन में गड़बड़ियों के साथ नीट-यूजी पेपर लीक को लेकर शिक्षा मंत्रालय और एनटीए के अधिकारियों के साथ भी समिति चर्चा करेगी। समिति ने इस दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों व स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों को भी बुलाया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने मंगलवार को बैठक से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए कहा कि छात्रों की शिकायतों को देखते हुए स्पष्ट है कि सीबीएसई में गड़बड़ी तो हुई है।साथ ही सवाल करते हुए कहा मूल्यांकन के लिए ओएसएम को डिजाइन किसने किया।
इसका वेंडर कौन है और उसका अनुभव क्या है। इनके जवाब सीबीएसई को देने होंगे। समिति ने एक और दो जून होने वाली बैठक के एजेंडे में जिन विषयों कोप्रमुखता से शामिल किया है, उनमें उनमें बारहवीं कक्षा में मूल्यांकन के लिए अपनाए गए ओएसएम (आन-स्क्रीन मार्किंग) सिस्टम, पुनर्मूल्यांकन से जुड़ी छात्रों की दिक्कतों व सवालों आदि को प्रमुखता से शामिल किया गया है।
समिति ने अपने एजेंडे में नीट-यूजी पेपर लीक मामले पर को भी प्रमुखता से शामिल किया है। राज्यसभा सचिवालय की ओर से बैठक को लेकर जारी किए एजेंडे में सीबीएसई की ओर से नौवीं व दसवीं कक्षा में हाल ही में लागू शामिल किए गए त्रिभाषा फार्मूले को भी चर्चा में शामिल किया है।
समिति ने सीबीएसई के मुद्दे को अपने एजेंडे में सुनवाई के लिए दो जून को शामिल किया है। जिसमें शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा विभाग के सचिव संजय कुमार और सीबीएसई के अध्यक्ष राहुल सिंह को बुलाया गया है।
समिति एजेंडे के मुताबिक एक जून को शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की अनुदान मांगों पर समिति की सिफारिशों व उसके अमल पर चर्चा की जाएगी। इससे पहले समिति ने 21 मई को नीट-यूजी पेपर लीक को लेकर शिक्षा मंत्रालय के आला अधिकारियों व एनटीए के अध्यक्ष को बुलाया था।
गौरतलब है कि नीट-यूजी के बाद इन दिनों सीबीएसई की ओर से बारहवीं कक्षा में मूल्यांकन के लिए अपनाया ओएसएम सिस्टम चर्चा में है। छात्रों का आरोप है कि इस नए सिस्टम के चलते उन्हें कम अंक मिले है। वहीं पुनर्मूल्यांकन के लिए भी छात्रों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।