केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। गुरुवार को नाम वापसी की समयसीमा खत्म होने के बाद उनके मुकाबले कोई दूसरा उम्मीदवार मैदान में नहीं बचा। दरअसल, उपचुनाव में नामांकन दाखिल करने वाले दो अन्य उम्मीदवारों के पर्चे जांच के दौरान खारिज कर दिए गए थे। इसके बाद पुरी अकेले उम्मीदवार रह गए। मध्य प्रदेश विधानसभा में रिटर्निंग ऑफिसर उमेश कुमार शर्मा ने उन्हें निर्वाचन प्रमाणपत्र जारी किया। इस मौके पर भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और विधायक मौजूद रहे।
हरदीप सिंह पुरी निर्विरोध राज्यसभा कैसे चुने गए?
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की खाली हुई सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा था। हरदीप सिंह पुरी के अलावा राजकुमार लोहानी और कांते सयन्ना ने भी नामांकन दाखिल किया था। हालांकि, जांच के दौरान दोनों के नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए। इसके बाद पुरी ही चुनाव मैदान में अकेले उम्मीदवार रह गए। पांच नवंबर को दोपहर तीन बजे तक नाम वापस लेने की समयसीमा थी। इस समय तक किसी दूसरे उम्मीदवार के मैदान में नहीं रहने के कारण पुरी निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए। यानी इस सीट पर मतदान कराने की जरूरत नहीं पड़ी।
दो उम्मीदवारों के नामांकन आखिर क्यों खारिज किए गए?
रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश के मुताबिक, कांते सयन्ना का नामांकन जरूरी प्रस्तावकों के हस्ताक्षर नहीं होने के कारण खारिज हुआ। नियम के अनुसार उनके नामांकन के लिए विधानसभा के कम से कम 10 निर्वाचित सदस्यों या कुल निर्वाचित सदस्यों के 10 प्रतिशत के हस्ताक्षर जरूरी थे। इनमें जो संख्या कम हो, उतने सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए थे। वहीं, राजकुमार लोहानी का नामांकन जरूरी फॉर्म-26 का शपथपत्र समय पर जमा नहीं करने के कारण खारिज हुआ। उन्हें दो नवंबर को दोपहर तीन बजे तक यह दस्तावेज जमा करना था, लेकिन तय समयसीमा पूरी हो गई।
हरदीप सिंह पुरी के नामांकन पर कांग्रेस ने क्या आपत्ति उठाई थी?
हरदीप सिंह पुरी ने 31 अक्तूबर को भोपाल स्थित मध्य प्रदेश विधानसभा में अपना नामांकन दाखिल किया था। इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव, उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और जगदीश देवड़ा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और राज्य सरकार के कई मंत्री मौजूद थे। तीन नवंबर को रिटर्निंग ऑफिसर ने पुरी के नामांकन पत्र स्वीकार कर लिए। इससे पहले कांग्रेस नेताओं और निर्दलीय उम्मीदवारों की ओर से उनके नामांकन पर आपत्तियां उठाई गई थीं। हालांकि, जांच के दौरान इन आपत्तियों को खारिज कर दिया गया और उनका नामांकन वैध माना गया।
किस सीट पर हरदीप सिंह पुरी निर्विरोध चुने गए हैं?
मध्य प्रदेश की यह राज्यसभा सीट केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। उन्होंने 14 अक्तूबर को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। उनका कार्यकाल मूल रूप से दो अप्रैल 2030 तक था। उनके इस्तीफे के कारण इस सीट पर उपचुनाव कराना पड़ा। भाजपा ने इस सीट से हरदीप सिंह पुरी को उम्मीदवार बनाया था। नामांकन की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुरी का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया।