डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। एसआईआर विवाद पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके एकतरफा फैसलों के लिए निलंबित करने की मांग वाली याचिका भी अदालत में डाली गई है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने रविवार को कहा कि मतदाता सूचियों से लोगों को ‘अवैध रूप से बाहर करने के कारण देश का लोकतंत्र बहुत खतरे में है।
न्यायमूर्ति नरीमन ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में समस्या पर भी प्रकाश डाला, जो केंद्र के हाथों में है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट इस मौके पर आगे आएगा और सिस्टम में व्याप्त गलतियों को सुधारेगा। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में हटाए गए मतदाताओं के लगभग 93% मामलों का फैसला उनके पक्ष में किया गया था, जिसका मतलब है कि उन्हें अवैध रूप से हटा दिया गया था।
पूर्व जज जस्टिस नरीमन ने क्या कहा?
जस्टिस नरीमन ने कहा, “अब दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि यह सब हाल ही में अदालत के सामने आया। दो न्यायाधीशों में मतभेद था और अंतिम बात यह है कि अब यह एक पीठ के समक्ष चला गया है, शायद पांच न्यायाधीशों की ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह अच्छा कानून है या नहीं… लेकिन इस बीच, ये नियुक्तियां केवल तत्कालीन सरकार के हाथों में ही जारी रहती हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “अब हमने हाल ही में ऐसा होने का खतरा देखा है। आप सभी ने देखा है कि बंगाल चुनाव में 90 लाख मतदाता मताधिकार से वंचित हो गये। यह एक आश्चर्यजनक आंकड़ा है।” न्यायमूर्ति नरीमन ने कहा, ”मताधिकार से वंचित हो रहे नब्बे लाख मतदाताओं ने किसी तरह इस पर रोक लगाने के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख नहीं किया।”
फैसला मतदाताओं के पक्ष में हुआ
जिन लोगों को मताधिकार से वंचित किया गया, उनमें से लगभग 22 लाख ने अपील दायर की। पूर्व एससी न्यायाधीश ने कहा, “अन्य लोग ऐसे लोग होंगे जिनके पास न्याय तक साधन या पहुंच नहीं है।” न्यायमूर्ति नरीमन ने बताया कि 1 लाख अपीलों में से लगभग सभी का फैसला मतदाताओं के पक्ष में हुआ।
राजकोट के राजकुमार कॉलेज में संविधान और आम आदमी विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “तो आप कल्पना कर सकते हैं कि यह पूरी तरह से अवैध था। आम आदमी, भारत के नागरिक को परेशान करना ताकि एक सरकार जो चाहती है उसे प्राप्त कर सके और बंगाल में हमने देखा कि उसने तत्कालीन सरकार को हटा दिया और केंद्र की सरकार लाई। अब ये बहुत परेशान करने वाली चीजें हैं जो आज हमारे देश में हो रही हैं।”
उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि जिस संस्था से कभी मैं जुड़ा था सर्वोच्च न्यायालय तुरंत कदम उठाएगी और इन चीजों को ठीक करेगी। आपके पास ऐसा चुनाव आयोग नहीं हो सकता जो इस तरह से काम करे या गड़बड़ियां करे। इसलिए संविधान और आम आदमी के लिए पहला महत्वपूर्ण खतरा चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया है।”
जस्टिस नरीमन ने आगे कहा, “जितनी जल्दी संविधान पीठ फैसला करेगी, आपके पास एक प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता के साथ मुख्य न्यायाधीश या उनके नामित व्यक्ति जैसा कोई व्यक्ति होना चाहिए, जो तब सबसे अच्छे नामों को चुनता है ताकि यह देख सके कि वोट वास्तव में उसी में तब्दील हो जाएं जैसा उन्हें चाहिए था।”