डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। टाटा समूह के स्वामित्व वाली एअर इंडिया एक्सप्रेस और एअर इंडिया एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही हैं।
हाल के वर्षों में सप्लाई चेन की समस्याओं, हवाई क्षेत्र के संकटों, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनावों जैसी कई अप्रत्याशित चुनौतियों ने एयरलाइन की रफ्तार रोकने की कोशिश की। पिछले साल जून में हुए ड्रीमलाइनर हादसे जैसी दुखद घटनाओं के घाव भी अभी ताजा हैं।
इसके बावजूद, एअर इंडिया समूह के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी और एअर इंडिया एक्सप्रेस के चेयरमैन निपुण अग्रवाल ने अबू धाबी में उम्मीद जताते हुए कहा कि समूह का ‘ट्रांसफॉर्मेशन प्लान’ पूरी तरह पटरी पर है। एअर इंडिया समूह को अगले 18 महीनों में 50-60 नए विमान मिलने की उम्मीद है।
विमानों की आमद और आधुनिकीकरण की रफ्तार
विमानों की डिलीवरी और रीट्रोफिटिंग (पुराने विमानों के आधुनिकीकरण) में हुई देरी से यह कयास लगाए जा रहे थे कि बदलाव की योजना पिछड़ सकती है। लेकिन निपुण अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि अगले 18 महीनों में एअर इंडिया समूह को लगभग 50 से 60 नए विमान मिलने की उम्मीद है।
समूह ने कुल 600 विमानों का ऑर्डर दिया है, जिनमें से 10 प्रतिशत से कम की डिलीवरी हुई है। अगले सात-आठ वर्षों तक हर साल 50 से 60 विमान (जिसमें 10-15 वाइड-बॉडी और 45-50 नैरो-बॉडी विमान शामिल हैं) बेड़े में शामिल होंगे।
एअर इंडिया एक्सप्रेस मार्च 2026 तक अपने सभी विमानों को एक समान बेड़े में बदल लेगी, जबकि एअर इंडिया के वाइड-बॉडी विमानों का कायाकल्प अगले दो से तीन वर्षों में पूरा होगा।
केवल समय की पाबंदी ही नहीं, बेहतरीन अनुभव का लक्ष्य
विमानों की कमी और पश्चिम एशिया संकट के कारण एअर इंडिया को अपनी कुछ उड़ानें कम करनी पड़ी थीं, लेकिन अब नेटवर्क को दोबारा बहाल किया जा रहा है। पुराने केबिनों और विमानों के रखरखाव का दर्दनाक दौर अब पीछे छूट चुका है।
निपुण अग्रवाल के अनुसार, आज का भारतीय यात्री सिर्फ समय की पाबंदी या सुरक्षा ही नहीं, बल्कि एक शानदार सफर का अनुभव चाहता है। यही वजह है कि एअर इंडिया एक्सप्रेस खुद को एक ‘वैल्यू कैरियर’ के रूप में स्थापित कर रही है।