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सीजेपी और सरकार की ये चार बातें जो पैदा करती हैं कई कन्फ्यूजन

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Jul 22, 2026


दिल्ली सीजेपी प्रदर्शन

इमेज स्रोत, @JPNadda

इमेज कैप्शन, सोमवार को जेपी नड्डा ने सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका से मुलाक़ात की थी

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भारत जैसे विविधता से भरे लोकतांत्रिक देश में विरोध-प्रदर्शन बहुत ही आम बात रही है.

लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एक मज़बूत सरकार में ऐसे विरोध प्रदर्शन बहुत कम देखने को मिले हैं, जिनसे सरकार चिंतित दिखे.

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का गठन भारत के लोकतांत्रिक ढांचे से हुई एक टिप्पणी से ही हुआ था और यह पार्टी उसके ढाँचे में सुधार की मांग को लेकर वर्चुअल दुनिया से ज़मीन पर आ गई है.

मोदी सरकार ने सीजेपी के आंदोलन और सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को अब तक जिस तरह से हैंडल किया, उससे यही लग रहा है कि उसे इसकी तीव्रता का अंदाज़ा नहीं था.

सरकार को ऐसा लग रहा था कि यह आंदोलन ख़ुद से ही ख़त्म हो जाएगा. लेकिन सोमवार (20 जुलाई) को जो कुछ भी हुआ, उससे यही लग रहा है कि यह विरोध महज सीजेपी का नहीं है बल्कि वैसे लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए हैं, जिन्हें सरकार से नाराज़गी थी.

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