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सुप्रीम कोर्ट की बड़ी चेतावनी, कहा- आधिकारिक वेबसाइट की नकल करने वाली फर्जी साइट से रहें सावधान

Byadmin

Nov 4, 2026


पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने मंगलवार को उसकी आधिकारिक वेबसाइट की नकल करने वाले फर्जी डोमेन के निर्माण को लेकर सार्वजनिक सूचना जारी की और सभी हितधारकों को निजी या वित्तीय जानकारी साझा नहीं करने की चेतावनी दी।

सूचना में कहा गया, यह एडवाइजरी 16 जुलाई, 2025; 28 अप्रैल, 2026 और 13 अगस्त, 2026 को जारी पूर्व सार्वजनिक नोटिसों के क्रम में जारी की गई है। ये नोटिस सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट की नकल करने वाली भ्रामक वेबसाइटों के बारे में थीं, जिन्हें टारगेटेड फिशिंग मेकेनिज्म के जरिये जनता को ठगने के इरादे से बनाया गया था।

रजिस्ट्री सभी हितधारकों को इस नए फर्जी डोमेन scigovinjudicial.com को लेकर आगाह करती है। यह डोमेन फिलहाल इस अदालत की आधिकारिक आनलाइन मौजूदगी की नकल है।

रजिस्ट्री ने कहा कि साइबर अपराधी उक्त लिंक के जरिये जनता से संवेदनशील निजी डाटा और गोपनीय लाग-इन विवरण हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।

सभी हितधारकों को निजी या वित्तीय जानकारी साझा करने के प्रति सख्ती से आगाह किया जाता है, क्योंकि ऐसी जानकारी देने से अपराधियों को डाटा चुराने में मदद मिल सकती है। रजिस्ट्री ने सभी को सतर्क रहने और इलेक्ट्रानिक संचार की प्रामाणिकता जांचने की सलाह दी।

रजिस्ट्री ने कहा, भारत का सुप्रीम कोर्ट sci.gov.in डोमेन का पंजीकृत यूजर है। लोगों को किसी भी वेबसाइट से जुड़ने से पहले उसके यूआरएल पर माउस ले जाकर उसकी प्रामाणिकता जांचने की सलाह दी जाती है।

जिन लोगों को संदेह है कि वे इस फिशिंग प्रयास का शिकार हुए हैं, उन्हें तुरंत अपने सभी ऑनलाइन खातों के पासवर्ड बदलने चाहिए और अनधिकृत पहुंच की सूचना देने के लिए अपने-अपने बैंकों को सूचित करना चाहिए।

रजिस्ट्री ने इससे पहले भी उसकी आधिकारिक वेबसाइट की नकल करने वाली कई फर्जी वेबसाइटों के निर्माण को लेकर सार्वजनिक सूचना जारी की थी और आगाह किया था कि वे लोगों से निजी जानकारी और गोपनीय विवरण मांग रही हैं।

वक्फ संशोधन कानून की संवैधानिक वैधता पर 21 जनवरी को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई अगले साल 21 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी।

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने सभी पक्षों को 31 दिसंबर, 2026 तक अपनी दलीलें पूरी करने का निर्देश दिया।

सुनवाई के दौरान शीर्ष न्यायालय को बताया गया कि पहले पांच प्रमुख याचिकाओं की पहचान की गई थी, जबकि 135 अन्य याचिकाओं को अंतरिम आवेदनों में परिवर्तित किया गया है।

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