अरविंद पांडेय, जागरण, नई दिल्ली। देश के स्कूलों में भले नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति ( एनईपी) के तहत एआइ और कोडिंग जैसी चीजों को पढ़ाने की पहल हो रही है, लेकिन हकीकत यह है कि देश के 784 जिलों में 327 जिले डिजिटल लर्निंग में यानी स्कूलों में बच्चों को डिजिटल तरीके से पढ़ाने में बहुत पीछे हैं।
इनमें बिहार, बंगाल के सभी जिलों के साथ उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में 67 जिले व झारखंड के 24 में से 23 जिले शामिल है।
कुछ ऐसी ही स्थिति मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर व असम जैसे राज्यों की भी है। जिनके अधिकांश जिले डिजिटल लर्निंग में न्यूनतम 30 प्रतिशत का स्कोर भी हासिल नहीं कर पाए है। यानी पास नहीं हो पाए है।डिजिटल लर्निंग को लेकर यह जानकारी देश के सभी 784 जिलों में स्कूली शिक्षा की स्थिति को परखने के लिए शिक्षा मंत्रालय की ओर से कराए गए सर्वे में सामने आयी है।
यह सर्वे छह श्रेणियों में कराया था। इसके लिए 70 मानक निर्धारित किए गए थे। कुल छह सौ अंकों के इस सर्वे में डिजिटल लर्निंग श्रेणी के लिए 50 अंक निर्धारित किए गए थे। वर्ष 2025- 26 की इस रिपोर्ट में डिजिटल लर्निंग की श्रेणी में चंडीगढ़, केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, तेंलगाना, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड जैसे राज्यों का प्रदर्शन बेहतर रहा है।
इन पांच मानकों पर हुई थी स्कूलों में डिजिटल लर्निंग की परख
पहला- क्या स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई के लिए इंटरनेट की सुविधा है।
दूसरा-क्या स्कूलों में कंप्यूटर-लैपटाप है।
तीसरी- क्या स्कूलों में स्मार्ट क्लास रूप की सुविधा है।
चौथा- प्रति कंप्यूटर बच्चों का अनुपात।
पांचवा- क्या स्कूलों में कंप्यूटर के जरिए पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षक है।
(नोट- प्रति सवाल के दस अंक निर्धारित किए गए थे)
इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति सुधरी, लेकिन लर्निंग आउटकम में अभी भी कमजोर
जिलों में स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति काफी सुधरी है। इसका अंदाजा जिलों को लेकर जारी पीजीआई रिपोर्ट 2025-26 से लगाया जा सकता है, जिसमें कुल 784 जिलों में से 523 जिले अब उत्कर्ष, उत्तम एक, दो व तीन और प्रचेष्टा एक की श्रेणी में पहुंच गए है।
वहीं लर्निंग आउटकम में देश के 784 जिलों में से 540 जिले अभी प्रचेष्टा दो व तीन व आकांक्षी-एक श्रेणी में है। यानी लर्निंग आउट कम में 50 प्रतिशत व उससे कम अंक हासिल कर अभी भी कमजोर बने हुए है।
गौरतलब है कि इस परख में 90 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वाले जिलों को उत्कर्ष श्रेणी, 81 से 90 प्रतिशत पर उत्तम-एक, 70 से 80 प्रतिशत पर उत्तम-दो, 61 से 70 प्रतिशत पर उत्तम-तीन, 51 से 60 प्रतिशत पर प्रचेष्टा-एक, 41 से 50 प्रतिशत पर प्रचेष्टा-दो, 31 से 40 प्रतिशत पर प्रचेष्टा-तीन, 21 से 30 प्रतिशत अंक पर आकांक्षी-एक, 11 से 20 प्रतिशत पर आकांक्षी-दो और दस प्रतिशत व उससे कम पर आकांक्षी-तीन जिलों की श्रेणी प्रदान की जाती है।