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हाइड्रोपावर: नेपाल के लिए जिसे वरदान कहा गया वो अब क्यों घिरा हुआ है ख़तरे में

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Sep 6, 2026


नेपाल की राजधानी काठमांडू के एक चौराहे पर दुकानों और वाहनों की जगमगाहट से चहल-पहल का माहौल है.

इमेज स्रोत, Didier Marti

इमेज कैप्शन, आठ साल पहले तक नेपाल को लंबे समय तक बिजली कटौती की समस्या का सामना करना पड़ता था

नेपाल की बिजली का लगभग 100% हिस्सा जलविद्युत या हाइड्रोपावर से आता है. यह उत्पादन क्षमता इतनी है कि नेपाल हर साल भारत और बांग्लादेश को बिजली बेचकर क़रीब 200 मिलियन डॉलर कमाता है.

लेकिन जिन ग्लेशियरों और पहाड़ों ने नेपाल को यह प्राकृतिक वरदान दिया है, वही अब ग्लोबल वॉर्मिंग की चपेट में हैं – और पिछले बुधवार (26 अगस्त) की भीषण बाढ़ ने देश की जलविद्युत महत्वाकांक्षाओं के जोखिम को उजागर कर दिया है.

इस आपदा में 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि हज़ारों अब भी लापता हैं.

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास पूरे-पूरे गाँव बह गए. त्रिशूली नदी बेसिन में 12 जलविद्युत संयंत्र बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और नेपाल की कुल बिजली उत्पादन क्षमता के 10% से अधिक हिस्से को ठप कर दिया.

संयंत्र संचालकों ने बीबीसी को बताया कि उन्हें अभी तक यह भी नहीं पता कि इनमें से कोई संयंत्र दोबारा चालू हो भी पाएगा या नहीं.

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