डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका की प्रतिष्ठित हार्वर्ड विश्वविद्यालय में एमबीए में एडमिशन मिलने की खुशी उस समय निराशा में बदल गई, जब एक भारतीय छात्रा को अमेरिकी दूतावास ने F-1 छात्र वीजा देने से इनकार कर दिया।
इतना नहीं, वीजा अधिकारी ने उनका पहले से मान्य B1/B2 वीजा भी बिना किसी पूर्वाग्रह के रद कर दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर साझा की गई इस आपबीती ने वीजा प्रक्रिया और एजेंटों की भूमिका पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालांकि, रेडिट पोस्ट की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
5 लाख रुपए किए थे जमा
रेडिटर के अनुसार, उन्हें नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास में वीजा इंटरव्यू के लिए अपॉइंटमेंट स्लॉट पाने हेतु एक एजेंट की मदद लेनी पड़ी, जिसे उन्होंने लगभग 5 लाख की बड़ी रकम चुकाई थी। इंटरव्यू के दौरान अधिकारियों द्वारा सामान्य सवाल पूछे गए।
छात्रा ने बताया कि वह वर्तमान में एक बिग-4 कंसल्टिंग फर्म में कार्यरत हैं और उनका सालाना पैकेज 49 लाख है। जब वीजा अधिकारी ने इतनी अच्छी नौकरी छोड़कर एमबीए करने का कारण पूछा, तो उन्होंने इसे अपने करियर और लीडरशिप स्किल्स में निवेश बताया।
पिता के हीरे के व्यापारी और मां चलाती हैं NGO
इंटरव्यू में छात्रा ने अपने पारिवारिक और वित्तीय पृष्ठभूमि का भी ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि उनके पिता गुजरात में हीरे के व्यापारी हैं और मां जामनगर में एक एनजीओ चलाती हैं। उनका इरादा अमेरिका में बसने का नहीं है, बल्कि पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने पारिवारिक व्यवसाय से जुड़ने का है।
इसके अलावा, उनकी यात्रा पृष्ठभूमि भी काफी मजबूत थी—वह पहले ही 18 देशों की यात्रा कर चुकी थीं और उनके पास वैध B1/B2 अमरीकी वीजा भी मौजूद था। शुरुआत में अधिकारी ने हार्वर्ड में चयन के लिए उन्हें बधाई भी दी, लेकिन अंत में F-1 वीजा आवेदन को खारिज करते हुए उनके पास मौजूद B1/B2 वीजा को भी रद कर दिया।
पोस्ट की नहीं हुई है पुष्टि
हालांकि इस पोस्ट की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसने इंटरनेट पर एक नई बहस छेड़ दी है। कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं का मानना है कि स्लॉट बुकिंग के लिए एजेंट को 5 लाख जैसी मोटी रकम देना ही अमरीकी दूतावास के लिए सबसे बड़ा रेड फ्लैग बन गया होगा।
वहीं, कुछ लोगों ने इस कहानी की सत्यता पर संदेह जताते हुए तर्क दिया कि 49 लाख का पैकेज पाने वाले पेशेवर को पारिवारिक व्यवसाय में जाने के लिए हार्वर्ड से एमबीए की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
इन आलोचनाओं का जवाब देते हुए रेडिटर ने कहा कि हार्वर्ड जाना उनका व्यक्तिगत फैसला है और इसका वीजा की पात्रता से कोई संबंध नहीं होना चाहिए। इस घटना ने एक बार फिर अमेरिकी वीजा प्रक्रिया की अनिश्चितता और वीजा स्लॉट बुकिंग के नाम पर चल रहे महंगे एजेंट तंत्र को उजागर कर दिया है।