डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि हिंदुत्व सभी को साथ लेकर चलने और उनके व्यक्तिगत अधिकारों को संरक्षित करने के बारे में है और यह किसी के खिलाफ नहीं हो सकता।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने गुरुवार को यहां “विश्व संचार हिंदुत्व का” नामक पुस्तक के विमोचन के अवसर पर कहा,”हम सभी को एक साथ लेकर चलना चाहते हैं, लेकिन सभी के पास अपने अधिकार होने चाहिए जिन्हें संरक्षित किया जाना चाहिए। मुझे इतना अधिक महत्वाकांक्षी नहीं होना चाहिए कि मैं किसी के अधिकारों का अतिक्रमण कर सकूं। यह हिंदुत्व नहीं है। यह धर्म भी नहीं है।”
संघ के साथ अपने लंबे जुड़ाव को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “…हम भिन्न हैं, लेकिन हम एकजुट होते हैं। सांस्कृतिक हिंदुत्व मूल्यों, सांस्कृतिक जीवन के आदर्शों, वास्तविक मानव संबंधों और सार्वभौमिक कल्याण के तत्वों का एक संघ का प्रतिनिधित्व करता है।
हम हमेशा सोचते हैं कि जब हम कहते हैं हिंदुत्व, तो इसका मतलब है कि हम दूसरों के खिलाफ हैं। ऐसा नहीं है।”
राधाकृष्णन ने रेखांकित किया कि हिंदुत्व का विभिन्न ऐतिहासिक और बौद्धिक संदर्भों में अलग अर्थ रहा है। उन्होंने कहा,”इसकी विभिन्न राजनीतिक विचारकों, विद्वानों, आयोजकों और आलोचकों ने अलग-अलग व्याख्या की है।
इसलिए, इस विषय के साथ गंभीर जुड़ाव के लिए इसके ऐतिहासिक विकास, इसके दार्शनिक आयामों और इसके चारों ओर की विभिन्न व्याख्याओं की जांच करना आवश्यक है।” (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)