डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सऊदी अरब में मौत की सजा का सामना कर रहे अब्दुल रहीम 20 साल बाद बकरीद पर घर लौटे। लोगों ने क्राउडफंडिंग के जरिए ब्लड मनी के लिए 34 करोड़ रुपये जुटाए, तब जाकर कहीं उन्हें मौत की सजा से राहत मिली। रहीम केरल लौटने पर भावुक हो उठे और उनकी आंखें छलक पड़ीं। घर के दरवाजे पर खड़ी मां के गले लगकर वह रोने लगे। दोनों के आंखों में खुशी के आंसू थे।
रहीम नवंबर 2006 में अपने परिवार का सहारा बनने की उम्मीद में सऊदी अरब गए थे। रियाद पहुंचने के कुछ ही हफ्तों के भीतर उनके जीवन में एक दुखद मोड़ आ गया। रहीम को एक सऊदी परिवार के दिव्यांग बेटे अनस अल फायिस की देखभाल का जिम्मा सौंपा गया था। कार यात्रा के दौरान, रहीम के हाथ से गलती से अनस के लाइफ सपोर्ट सिस्टम की ट्यूब टूट गई। 15 वर्षीय अनस की कुछ ही क्षणों में दम घुटने से मृत्यु हो गई।
हालांकि, रहीम ने कहा कि यह एक दुर्घटना थी, जानबूझकर किया गया कृत्य नहीं, फिर भी उन्हें दिसंबर 2006 में गिरफ्तार कर लिया गया और 2012 में सऊदी अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई। इसके बाद दुनिया भर में मलयाली लोगों के बीच सबसे बड़े मानवीय अभियानों में से एक देखने को मिला। जब लड़के का परिवार अंततः ब्लड मनी के बदले रहीम को माफ करने के लिए सहमत हुआ, तो अब्दुल रहीम कानूनी सहायता समिति के माध्यम से दुनिया भर के मलयाली लोगों द्वारा 34 करोड़ रुपये जुटाए गए।
सामूहिक प्रयासों ने रहीम के जीवन के लिए असंभव से प्रतीत होने वाले संघर्ष को आशा और करुणा की कहानी में बदल दिया। जुलाई 2024 में उनकी मृत्युदंड की सजा आधिकारिक तौर पर रद कर दी गई। हालांकि, सऊदी अरब के सार्वजनिक अधिकार कानून के तहत रिहा होने से पहले उन्हें 20 साल की जेल की सजा पूरी करनी थी। वह इंतजार आखिरकार इस हफ्ते खत्म हो गया।-