पीटीआई, नई दिल्ली। गृह मंत्रालय 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में करीब 60 हजार स्वयंसेवकों का नागरिक सुरक्षा नेटवर्क बनाएगा। इन स्वयंसेवकों को सेना की ओर से प्रशिक्षण दिया जाएगा।
यह एक पायलट परियोजना का हिस्सा है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि पहले चरण में इसमें शामिल राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के सिविल डिफेंस मास्टर ट्रेनर को तीन दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
यह पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण से प्रेरित है। इसमें उन्होंने सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक प्रणालियों, तकनीकों और आधुनिक क्षमताओं से लैस नागरिक सुरक्षा नेटवर्क की परिकल्पना का एलान किया था।
इस परिकल्पना को आगे बढ़ाते हुए गृह मंत्रालय भारतीय सेना के जरिये सिविल डिफेंस मास्टर ट्रेनरों को विशेष प्रशिक्षण देकर सिविल डिफेंस की तैयारी मजबूत करने के लिए पहल शुरू कर रहा है।
पायलट परियोजना में शामिल राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, मेघालय, सिक्किम, असम, उत्तर प्रदेश, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु शामिल हैं।
सुरक्षा, आपदा राहत के लिए ब्राडबैंड नेटवर्क बनाने पर जनता की राय मांगी
गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि उसने देशभर में एक खास ब्राडबैंड नेटवर्क विकसित करने के लिए आम लोगों और हितधारकों से सुझाव मांगा है। इस नेटवर्क के जरिये लगभग 30 लाख पुलिस, अर्धसैनिक बलों और आपदा राहत कर्मियों को पुश-टू-टॉक, वीडियो और डाटा लिंक सेवा मिलेगी।
मंत्रालय ने कहा कि उसकी योजना पूरे भारत में ब्राडबैंड पब्लिक प्रोटेक्शन एंड डिजास्टर रिलीफ (बीबी-पीपीडीआर) नेटवर्क लागू करने की है।
इसके तहत राज्यों की पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), अग्निशमन सेवा, चिकित्सा सेवा और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को मिशन-क्रिटिकल पुश-टू-टॉक, मिशन-क्रिटिकल डाटा और मिशन-क्रिटिकल वीडियो की सुविधाएं दी जाएंगी।
मंत्रालय ने परियोजना के लिए 10 स्थानों को चुना है। इनमें अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, अमृतसर, बस्तर, बेंगलुरु, गुवाहाटी, लद्दाख, लक्षद्वीप, मुंबई, रुद्रप्रयाग और विशाखापत्तनम शामिल हैं।