09:04 AM, 25-Jun-2026
Nirjala Ekadashi 2026 Live: राशि अनुसार करें दान
- मेष: सप्तधान्य (सात प्रकार के अनाज)
- वृषभ: पानी से भरा घड़ा
- मिथुन: मौसमी फल
- कर्क: दूध या मिश्री
- सिंह: तांबे का पात्र या धार्मिक पुस्तकें
- कन्या: जल से भरा घड़ा और हाथ का पंखा
- तुला: पीले वस्त्र या अन्न
- वृश्चिक: सत्तू या गुड़
- धनु: चने की दाल और पीले फल
- मकर: उड़द की दाल या छाता
- कुंभ: पीने का पानी या शरबत
- मीन: पीले अनाज या केले
08:50 AM, 25-Jun-2026
Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी पर तुलसी दल तोड़ने के नियम
सनातन परंपराओं में निर्जला एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना उचित नहीं माना जाता है। यह तिथि भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित होती है और तुलसी माता को भी विशेष सम्मान दिया जाता है। इसी कारण पूजा में चढ़ाने के लिए तुलसी दल एक दिन पहले ही एकत्र कर लेने की परंपरा प्रचलित है। भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व है और इसके बिना पूजा को अधूरा माना जाता है। यदि किसी कारणवश एकादशी के दिन तुलसी दल लेना आवश्यक हो जाए, तो पहले तुलसी माता को प्रणाम कर उनसे क्षमा प्रार्थना करने की मान्यता है। मान्यता है कि नियमों का पालन करते हुए श्रद्धापूर्वक की गई विष्णु और तुलसी पूजा से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।
08:31 AM, 25-Jun-2026
Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी पर भूलकर भी न करें ये 5 काम
- तामसिक भोजन का सेवन न करें
- क्रोध और विवाद से बचें
- तुलसी के पत्ते न तोड़ें
- आलस्य और अधिक नींद से दूर रहें
- किसी का अपमान न करें
08:21 AM, 25-Jun-2026
Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी पूजा सामग्री
- तुलसी दल
- पीले फूल
- चंदन
- अक्षत (चावल)
- रोली
- धूप
- दीपक
- घी
- कपूर
- पंचामृत
- मौसमी फल
- नारियल
- मिष्ठान
- पीले वस्त्र
- जल से भरा कलश
- शंख
- गंगाजल
08:07 AM, 25-Jun-2026
Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी को क्यों कहलाती है भीमसेनी एकादशी ?
निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी कहे जाने के पीछे भी एक रोचक पौराणिक कथा जुड़ी है। कहा जाता है कि पांडव परिवार में माता कुंती, युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव और द्रौपदी, सभी साल भर आने वाली 24 एकादशियों का व्रत बड़ी नियमितता के साथ रखते थे। और वे चाहते थे कि भीमसेन भी इस परंपरा का पालन करें। लेकिन भीम की समस्या यह थी कि वे अपनी तेज भूख पर काबू नहीं रख पाते थे, जिस वजह से महीने में दो बार उपवास करना उनके लिए बेहद कठिन था। अपनी इस उलझन को सुलझाने के लिए भीम महर्षि वेद व्यास के पास पहुंचे। वेद व्यास ने उन्हें सुझाव दिया कि यदि पूरे साल की एकादशियां रख पाना संभव नहीं है, तो वे सिर्फ ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष एकादशी का व्रत रख लें, लेकिन इस दौरान कुल्ले के अलावा जल की एक भी बूंद ग्रहण न करें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भीम सच्चे मन से इस एक दिन का निर्जला व्रत पूरा कर लें, तो उन्हें साल भर की सभी 24 एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त हो जाएगा। व्यासजी की इस सलाह को मानकर भीम ने पूरी दृढ़ता से यह व्रत संपन्न किया और इस तरह एक ही दिन में पूरे वर्ष की एकादशियों का फल प्राप्त कर लिया। इसी कथा के चलते इस तिथि को भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
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07:58 AM, 25-Jun-2026
Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी पर क्या दान करें?
- जल से भरा मिट्टी का घड़ा
- खरबूजा, तरबूज और आम जैसे मौसमी फल
- हाथ का पंखा या छाता
- सत्तू और चने की दाल
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07:48 AM, 25-Jun-2026
Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी पर गंगा स्नान का महत्व
निर्जला एकादशी के अवसर पर गंगा स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ गंगा में स्नान करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त होती है तथा पापों का क्षय होता है। निर्जला एकादशी का व्रत, भगवान विष्णु की आराधना और गंगा स्नान का संयोग अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन स्नान के बाद भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने पर पुण्य फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। जो श्रद्धालु गंगा नदी तक नहीं पहुंच सकते, वे स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करें। ऐसा करने से भी गंगा स्नान के समान पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है।
07:31 AM, 25-Jun-2026
Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी पर मंत्र जाप
- ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
- ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
- ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान।
- यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्टं च लभ्यते।।
- शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्, विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।
- लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम् , वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥
- मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः। मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
07:16 AM, 25-Jun-2026
Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु को क्या अर्पित करें?
- निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल अर्पित करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
- भगवान को पीले रंग के पुष्प अर्पित किए जाते हैं, जो शुभता और समृद्धि का प्रतीक हैं।
- चंदन का तिलक लगाकर श्रीहरि की पूजा की जाती है।
- अक्षत (चावल) अर्पित कर मंगलकामना की जाती है।
- पंचामृत से भगवान विष्णु का अभिषेक करना पुण्यदायी माना जाता है।
- मौसमी फल और नैवेद्य अर्पित कर भगवान का भोग लगाया जाता है।
- पूजा के दौरान घी का दीपक जलाकर आराधना की जाती है।
Nirjala Ekadashi Upay: निर्जला एकादशी पर करें तुलसी से जुड़े खास उपाय, हर मनोकामना होगी पूरी
07:01 AM, 25-Jun-2026
Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी पूजा विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त हों और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करके उसे तैयार करें।
- हाथ में जल और पुष्प लेकर निर्जला एकादशी व्रत तथा भगवान विष्णु की पूजा का संकल्प लें।
- एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर उसे फूलों से सजाएं और भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- पंचामृत से भगवान विष्णु का अभिषेक करें।
- श्रीहरि को पीले पुष्प, चंदन, अक्षत, हल्दी, तुलसी दल, धूप, दीप, फल, पान, सुपारी और वस्त्र अर्पित करें।
- श्रद्धापूर्वक विष्णु सहस्रनाम और विष्णु चालीसा का पाठ करें।
- निर्जला एकादशी व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें।
- कपूर या घी के दीपक से भगवान विष्णु की आरती करें।
- पूजा पूर्ण होने पर जल से भरा मिट्टी का कलश दान करें।
- पूरे दिन निराहार रहकर व्रत का पालन करें और भजन-कीर्तन तथा भगवान के स्मरण में समय बिताएं।
- सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में दीप प्रज्वलित कर पुनः विष्णु पूजा करें।
- रात्रि में यथाशक्ति जागरण कर भगवान का भजन करें।
- अगले दिन प्रातः स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा करें।