डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के यह भरोसा जताने के बाद कि 2029 तक एनडीए शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर दिया जाएगा।
लेकिन इस मुद्दे पर बीजेपी के तीन प्रमुख सहयोगी दलों, तेलुगु देशम पार्टी (TDP), जनता दल यूनाइटेड (JD-U) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने इस मुद्दे पर सतर्क रुख अपनाया है।
UCC को लेकर आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी टीडीपी के संसदीय दल के नेता लवू श्री कृष्ण देवरायालु ने कहा कि इस मुद्दे पर अभी तक कोई चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में इस पर कदम उठाने से पहले सभी संबंधित पक्षों और समाज के अलग-अलग वर्गों के साथ बातचीत की जाएगी।
वहीं, बिहार में भाजपा की सहयोगी जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने बताया कि वह इस मुद्दे को लेकर जल्द ही गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर चर्चा करेंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले भी कह चुके हैं कि UCC जैसे विषय पर सभी समुदायों को साथ लेकर सहमति बनाई जानी चाहिए।
लोजपा (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने भी पूरी सावधानी बरतते हुए कहा कि उनकी पार्टी देश की विविधता और संविधान में अलग-अलग समुदायों व अनुसूचित जनजातियों को दी गई व्यवस्थाओं का सम्मान करती है।
उन्होंने कहा कि UCC का मसौदा जनता के सामने लाया जाना चाहिए और सभी पक्षों से सलाह-मशविरा करने के बाद ही उनकी पार्टी अपना रुख तय करेगी।
भाजपा के एजेंडे में सबसे ऊपर है UCC
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद UCC लागू करना भाजपा के मुख्य लक्ष्यों में शामिल है। केंद्र सरकार ने इसे एक साथ पूरे देश में लागू करने के बजाय राज्य स्तर पर लागू करने की रणनीति अपनाई है।
उत्तराखंड में UCC पहले ही लागू हो चुका है, जबकि गुजरात, असम और मध्य प्रदेश की विधानसभाओं ने इससे जुड़ा कानून पास कर दिया है। राजस्थान, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी इस दिशा में प्रक्रिया चल रही है।
लोकसभा चुनाव से पहले लागू करने का लक्ष्य
मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने भरोसा जताया था कि 2029 में होने वाले अगले लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए शासन वाले सभी 21 राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू कर दिया जाएगा।