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अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार शियाओं के साथ क्यों कर रही है ‘ज़्यादती’

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Jun 2, 2026


Afghanistan

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, काबुल में एक वरिष्ठ शिया मौलवी ने आरोप लगाया कि तालिबान ने उन्हें प्रताड़ित किया (प्रतीकात्मक तस्वीर)

    • Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
  • प्रकाशित

  • पढ़ने का समय: 9 मिनट

तालिबान की सरकार ने अफ़ग़ानिस्तान के शिया समुदाय पर अपनी पाबंदियों में धीरे-धीरे इज़ाफ़ा किया है.

हाल ही में काबुल में एक वरिष्ठ शिया आलिम ने आरोप लगाया कि तालिबान ने अस्थायी निकाह (निकाह-ए-मुतआ) का अनुबंध कराने पर उन्हें तलब किया और उनके साथ हिंसा की गई.

यह प्रथा शिया जाफ़री फ़िक़्ह (धार्मिक क़ानून की परंपरा) में मान्य है, लेकिन सुन्नी हनफ़ी फ़िक़्ह में नहीं.

जाफ़रिया फ़िक़्ह को तालिबान से पहले की अफ़ग़ान सरकार ने बाक़ायदा मान्यता दी थी. लेकिन तालिबान ने पूर्ववर्ती सरकार की क़ानून-व्यवस्था को रद्द कर दिया और अन्य इस्लामी फ़िक़्ह को नज़रअंदाज़ करते हुए केवल हनफ़ी फ़िक़्ह को बढ़ावा दिया.

‘अस्थायी निकाह अनुबंध कराने पर तलब’

काबुल में वरिष्ठ शिया आलिम आयतुल्लाह हुसैनदाद शरीफ़ी ने आरोप लगाया कि तालिबान अधिकारियों ने उन्हें अस्थायी निकाह का अनुबंध कराने पर बुलाया और मारपीट की, जबकि यह शिया जाफ़री फ़िक़्ह में स्वीकार्य है.

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