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अमेरिकी चुनाव: ‘यह एक तबाही है’, हार के लिए रिपब्लिकन नेताओं ने ट्रंप को ठहराया ज़िम्मेदार

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Nov 4, 2026


रिपब्लिकन पार्टी के एक वरिष्ठ लॉबिस्ट ने कहा कि यह नतीजा ट्रंप को मतदाताओं की ओर से ख़ारिज किए जाने जैसा था

इमेज कैप्शन, रिपब्लिकन पार्टी के एक वरिष्ठ लॉबिस्ट ने कहा कि यह नतीजा ट्रंप को मतदाताओं की ओर से ख़ारिज किए जाने जैसा था

रिपब्लिकन पार्टी के भीतर मंगलवार रात (स्थानीय समय के मुताबिक़) चुनाव के चौंकाने वाले नतीजों से शुरुआती हैरानी जल्द ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ख़िलाफ़ ग़ुस्से में बदल गई.

टेक्सस, कंसास और साउथ कैरोलाइना जैसे उन राज्यों में भी डेमोक्रेटिक पार्टी ने एक के बाद एक अप्रत्याशित जीत दर्ज की, जिन्हें रिपब्लिकन पार्टी का मज़बूत गढ़ माना जाता है.

इसके बाद कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने हार के लिए ट्रंप को ज़िम्मेदार ठहराया.

उनका कहना था कि ट्रंप का ध्यान अपनी विरासत बनाने पर रहा और उन्होंने मतदाताओं की चिंताओं को नज़रअंदाज़ किया. इसकी क़ीमत पार्टी को चुकानी पड़ी.

टेक्सस के वरिष्ठ रिपब्लिकन लॉबिस्ट बिल मिलर ने बीबीसी से कहा, “इसकी ज़िम्मेदारी उन्हीं की है. किसी और की नहीं. यह राष्ट्रपति ट्रंप को पूरी तरह और साफ़ तौर पर ख़ारिज किया जाना है. यह बहुत बड़े स्तर की तबाही है. किसी ने नहीं सोचा था कि नतीजे ऐसे होंगे.”

वीडियो कैप्शन, यूएस मिडटर्म इलेक्शन: अमेरिका में रह रहे भारतीयों को किस बात की है चिंता?

बीबीसी ने पार्टी के एक दर्जन नेताओं, चुनाव अभियान से जुड़े अधिकारियों, व्हाइट हाउस के सहयोगियों और अन्य लोगों से बात की. इनमें से कई लोगों ने अपनी पहचान ज़ाहिर न करने की शर्त पर ट्रंप की चुनावी रणनीति का बेबाक आकलन किया.

इन नतीजों पर ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी, दोनों का बहुत कुछ दांव पर लगा था. अगर राष्ट्रपति की पार्टी ने बेहतर प्रदर्शन किया होता, जैसा कि 2022 में हुआ था, तो साल 2028 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले उसे कुछ बढ़त मिल सकती थी. 2022 में तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडन की डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा में सिर्फ़ नौ सीटें गंवाई थीं और सीनेट में एक सीट भी बढ़ा ली थी.

लेकिन अब ट्रंप को संसद में डेमोक्रेटिक पार्टी के ऐसे बहुमत का सामना करना पड़ेगा, जो प्रशासन की जांच करने, उनके न्यायिक नियुक्तियों को रोकने और उनके बाकी एजेंडे में अड़चन डालने के लिए तैयार है.

मिडटर्म चुनावों के नतीजों ने ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में एक अनिश्चित नया दौर शुरू कर दिया है. इससे रिपब्लिकन पार्टी को ट्रंप के बाद के अपने भविष्य पर भी विचार करना पड़ सकता है.

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वीडियो कैप्शन, ट्रंप बोले, ‘मैं चुनाव में नहीं था, अगर होता तो…’

आयोवा में रिपब्लिकन पार्टी के नेशनल कमेटीमैन स्टीव शेफ़लर ने चुनाव से एक दिन पहले कहा था, “मुझे नहीं लगता कि ट्रंप का प्रभाव कम हो रहा है.” हालांकि, उन्होंने कहा कि मिडटर्म चुनावों के मामले में “कुछ ऐसी बातें थीं, जिन्हें लेकर आप चाहते कि ट्रंप कुछ अलग कहते.”

चुनाव की रात ट्रंप ज़्यादातर समय ख़ामोश रहे. हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स और सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत घोषित होने के बाद उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट किया.

ट्रंप ने लिखा, “मैं चुनाव मैदान में नहीं था. अगर मैं होता, तो हम भारी बहुमत से जीतते.”

बाद में न्यूयॉर्क टाइम्स और फ़ॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वह चुनाव के नतीजे स्वीकार करेंगे.

फ़ॉक्स न्यूज़ से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि चुनाव के नतीजों से उन्हें “थोड़ी हैरानी” हुई, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि आम तौर पर मिडटर्म चुनावों में राष्ट्रपति की पार्टी का प्रदर्शन ख़राब रहता है.

ओहायो से रिपब्लिकन सीनेटर जॉन हस्टेड अपने परिवार के साथ कोलंबस में रिपब्लिकन पार्टी के चुनावी कार्यक्रम में बोलते हुए. इस दौरान वह नीचे देखते हुए अपनी आंख पोंछते नज़र आए.

इमेज कैप्शन, ओहायो में चुनावी कार्यक्रम के दौरान रिपब्लिकन सीनेटर जॉन हस्टेड. इस सीट पर डेमोक्रेटिक उम्मीदवार शेरोड ब्राउन ने जीत दर्ज की

साल 1934 के बाद से अब तक मिडटर्म चुनावों में सिर्फ़ तीन बार ऐसा हुआ है, जब व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति की पार्टी ने अपनी सीटें बढ़ाई हैं.

साल 2026 में डेमोक्रेटिक पार्टी की बढ़त ने कोई रिकॉर्ड नहीं बनाया, लेकिन उसने हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स, राज्यों के गवर्नर पदों और सीनेट की दर्जनों सीटों पर जीत हासिल की. इनमें ऐसे राज्य भी शामिल हैं, जहां पार्टी दशकों से चुनावी मुक़ाबले में नहीं थी.

मंगलवार के चुनाव से पहले डेमोक्रेटिक पार्टी ने सन 1932 के बाद से कंसास में सीनेट की कोई सीट नहीं जीती थी.

वहीं, टेक्सस में तीन दशक से भी ज़्यादा समय से पार्टी को किसी राज्यव्यापी चुनाव में जीत नहीं मिली थी.

पार्टी ने साउथ कैरोलाइना जैसे दूसरे उन राज्यों में भी अप्रत्याशित जीत दर्ज की, जिन्हें पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन पार्टी का मज़बूत गढ़ माना जाता है. चुनाव से कुछ हफ़्ते पहले तक इन राज्यों की सीटों को रिपब्लिकन पार्टी के लिए सुरक्षित माना जा रहा था.

मिडटर्म चुनावों से पहले ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दर्जनों चुनावी रैलियां की थीं. ट्रंप के क़रीबी लोगों की अगुवाई वाले मुख्य सुपर पीएसी (राजनीतिक अभियान के लिए धन जुटाने वाली समिति) मैगा इंक ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में करोड़ों डॉलर ख़र्च किए.

हालांकि, ट्रंप के सहयोगियों ने कहा कि चुनाव में पार्टी की हार के लिए उन्हें ज़िम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है. उन्होंने मिडटर्म चुनावों के पुराने रुझानों का हवाला दिया. साथ ही कहा कि जॉर्जिया, मिशिगन और टेक्सस जैसे अहम राज्यों में रिपब्लिकन पार्टी को कमज़ोर उम्मीदवारों का नुक़सान उठाना पड़ा.

टेक्सस के एक अन्य रिपब्लिकन नेता ने नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर कहा कि सीनेट चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार केन पैक्सटन ने “दोनों पार्टियों में देश का सबसे ख़राब चुनाव अभियान चलाया.”

उन्होंने कहा, “अगर केन के चुनाव अभियान ने एक लाख घरों तक पहुंचकर प्रचार किया हो, तो मुझे हैरानी होगी.”

उन्होंने यह भी कहा कि पैक्सटन को हराने वाले डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टालारिको ने “बहुत अच्छा और समझदारी भरा चुनाव अभियान चलाया.”

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वीडियो कैप्शन, नासा के एस्टोनॉट ने स्पेस से ऐसे किया मतदान

कुछ लोगों ने ट्रंप के चुनावी कार्यक्रम का बचाव भी किया. उनका कहना था कि ट्रंप को राष्ट्रपति के तौर पर देश चलाने की ज़िम्मेदारी और मिडटर्म चुनावों के लिए प्रचार के बीच संतुलन बनाना था.

मिशिगन रिपब्लिकन पार्टी के यूथ चेयर कृष्ण माथरानी ने कहा, “वह राष्ट्रपति हैं. उनसे यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह दिन-रात चुनाव प्रचार में लगे रहेंगे.”

माथरानी के मुताबिक़, ट्रंप की चुनावी रैलियों से रिपब्लिकन मतदाताओं में उत्साह बढ़ा. उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप लोगों को मतदान के लिए बाहर निकालने में माहिर हैं.”

राष्ट्रपति चुनावों में यह बात सही साबित होती है. लेकिन ट्रंप की जिस चुनावी मशीनरी को मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक लाने में बेहद असरदार माना जाता है, वह उन चुनावों में कामयाब नहीं रही है जिनमें ट्रंप ख़ुद उम्मीदवार नहीं होते. 2026 के चुनाव भी इससे अलग नहीं रहे.

मतदाताओं ने ट्रंप की इस दलील को ख़ारिज कर दिया कि उनके कार्यकाल में अर्थव्यवस्था बेहतर हुई है और ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका अपने मक़सद हासिल कर रहा है.

ट्रंप ने डेमोक्रेटिक पार्टी को कट्टर समाजवादी बताने की भी कोशिश की, लेकिन उनकी यह रणनीति काम नहीं आई. मतदाताओं ने नॉर्थ कैरोलाइना में रॉय कूपर जैसे उदारवादी उम्मीदवारों को जीत दिलाई.

कूपर के चुनाव अभियान से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, “कूपर के मामले में यह दांव काम नहीं आया. उन्हें समाजवादी उदारवादी बताने की कोशिश सफल नहीं होने वाली थी.”

4 नवंबर, 2026 को आयोवा के डेस मोइनेस स्थित हिल्टन डेस मोइनेस डाउनटाउन में रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी रात के कार्यक्रम के दौरान टीवी स्क्रीन देखते लोग.

इमेज कैप्शन, आयोवा में चुनावी नतीजे देखने के लिए आयोजित कार्यक्रम में रिपब्लिकन पार्टी के समर्थक. यहां डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जोश ट्यूरेक ने सीनेट की सीट जीत ली

गर्मियों के दौरान ट्रंप अक्सर मिडटर्म चुनावों में दिलचस्पी लेते नहीं दिखे. यह वही समय था, जब अमेरिकी संसद में रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं ने अपना ध्यान चुनावों पर केंद्रित करना शुरू कर दिया था.

उस दौरान ट्रंप का ध्यान विदेश में ईरान के साथ युद्ध और देश के भीतर वॉशिंगटन में निर्माण और नवीनीकरण की अपनी योजनाओं पर था. इन परियोजनाओं में व्हाइट हाउस का निर्माणाधीन बॉलरूम और उसके साउथ लॉन में हेलीपैड, स्थानीय गोल्फ़ कोर्स का नवीनीकरण, आर्लिंगटन कब्रिस्तान के पास प्रस्तावित स्मारक मेहराब और कैनेडी सेंटर का नवीनीकरण शामिल था.

कई लोगों ने बीबीसी को बताया कि जून में ट्रंप के 80वें जन्मदिन पर व्हाइट हाउस में यूएफ़सी मुक़ाबले जैसे आयोजनों से यह संदेश गया कि राष्ट्रपति मिडटर्म चुनाव जीतने के बजाय अपना जश्न मनाने में ज़्यादा दिलचस्पी रखते हैं.

ट्रंप ने पेट्रोल की बढ़ती क़ीमतों को भी बार-बार कम करके आंका. वह अक्सर लोगों के लिए बढ़ती महंगाई और ख़र्च का मुद्दा उठाने को डेमोक्रेटिक पार्टी का फैलाया हुआ झूठ बताते रहे.

सितंबर में रिपब्लिकन पार्टी के मिडटर्म सम्मेलन में ट्रंप ने चुनाव पर पूरा ध्यान देना शुरू किया. यह सम्मेलन आयोजित करना एक जोखिम भरा फ़ैसला था. रिपब्लिकन पार्टी ने दशकों से मिडटर्म चुनावों के लिए ऐसा सम्मेलन नहीं किया था. यह भी साफ़ नहीं था कि मतदाता इसमें दिलचस्पी लेंगे या नहीं.

डैलस में हुए इस सम्मेलन में ट्रंप ही छाए रहे. इससे रिपब्लिकन पार्टी के कुछ नेता नाराज़ हुए. उन्होंने बीबीसी से कहा कि वे चाहते थे कि सम्मेलन में पार्टी के मिडटर्म उम्मीदवारों को ज़्यादा जगह मिले.

अपने लंबे और भटकते हुए मुख्य भाषण में ट्रंप ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों को वोट देने वाले हर व्यक्ति को 5,000 डॉलर (क़रीब 4 लाख 70 हज़ार रुपए) देने का वादा किया. उन्होंने टेक्सस में सीनेट के उम्मीदवार केन पैक्सटन का समर्थन करते हुए उनकी आलोचना भी की. ट्रंप ने पैक्सटन के व्यक्तित्व में करिश्मे की कमी और उनकी शारीरिक बनावट पर काफ़ी देर तक टिप्पणी की. इस पर लोगों ने हैरानी जताई.

टेक्सस में रिपब्लिकन पार्टी के नेशनल कमिटीमैन रॉबिन आर्मस्ट्रॉन्ग ने पैक्सटन पर ट्रंप की टिप्पणी के बारे में कहा, “ज़ाहिर है, इससे कभी कोई फ़ायदा नहीं होता.” उन्होंने आगे कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप क्या कहते हैं, इसे आप रोक नहीं सकते. हमें बस इसके साथ जीना पड़ता है.”

इस सम्मेलन को टीवी पर बहुत ज़्यादा दर्शक नहीं मिले. डेमोक्रेटिक पार्टी ने भी इसे नाकाम क़रार देने में देर नहीं की.

टेक्सस डेमोक्रेटिक पार्टी की कार्यकारी निदेशक टेरी बर्क ने कहा, “यह रिपब्लिकन पार्टी के लिए उल्टा पड़ गया, क्योंकि किसी ने इस पर ध्यान ही नहीं दिया.”

चुनाव से पहले आख़िरी कुछ हफ़्तों में प्रचार के दौरान भी ट्रंप अक्सर अपने तय संदेश से भटकते रहे. ओहायो के रिपब्लिकन सीनेटर जॉन हस्टेड की शारीरिक बनावट की तारीफ़ करने को लेकर वह सुर्ख़ियों में आए. वहीं, मिशिगन के सीनेट चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद को “जिहादी” कहने पर उनकी आलोचना हुई.

मिशिगन से रिपब्लिकन पार्टी के पूर्व सांसद और सीनेट उम्मीदवार माइक रोजर्स चुनावी नतीजे देखने के लिए आयोजित कार्यक्रम में मंच से उतरने के बाद एक समर्थक से बात करते हुए.

इमेज कैप्शन, मिशिगन में हारने वाले उम्मीदवारों में माइक रोजर्स भी शामिल थे. उन्हें सीनेट की सीट के चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद ने हराया

ट्रंप जब रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में देशभर में चुनाव प्रचार कर रहे थे, उसी दौरान वॉशिंगटन में व्हाइट हाउस कई विवादों से घिरा रहा.

केटी ज़कारिया को व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव बनाए जाने के महज़ पांच दिन बाद ही पद से हटा दिया गया. वहीं, अमेरिकी राजदूत के तौर पर ग्रीस में तैनात किम्बर्ली गिलफ़ॉयल ने इस्तीफ़ा दे दिया. यह ख़बरें सामने आई थीं कि उन्होंने एक डोनर से अपने क्रेडिट कार्ड का क़र्ज़ चुकाने के लिए पैसे मांगे थे.

अक्तूबर में रूसी डीज़ल ख़रीदने का समझौता करने को लेकर भी ट्रंप को आलोचना का सामना करना पड़ा. इस समझौते की जानकारी अमेरिकी संसद के कई सदस्यों को नहीं थी. कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने भी इसकी निंदा की. यह समझौता ट्रंप के उस प्रतिबंध विधेयक पर हस्ताक्षर करने के कुछ ही हफ़्तों बाद हुआ था, जिसका मक़सद रूस की तेल और गैस से होने वाली कमाई रोकना था.

डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस समझौते और व्हाइट हाउस से जुड़े दूसरे विवादों को संसद पर फिर से नियंत्रण हासिल करने के अपने अभियान का मुद्दा बनाया. आख़िरकार, उसका यह संदेश मतदाताओं तक पहुंचा और पार्टी ने संसद के दोनों सदनों में स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया.

टेक्सस के अटॉर्नी जनरल और रिपब्लिकन पार्टी के सीनेट उम्मीदवार केन पैक्सटन डैलस में चुनावी नतीजे देखने के लिए आयोजित कार्यक्रम में

इमेज कैप्शन, टेक्सस में रिपब्लिकन सीनेट उम्मीदवार केन पैक्सटन को डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टालारिको ने हरा दिया

व्हाइट हाउस के एक दूसरे सहयोगी ने कहा कि राष्ट्रपति के राजनीतिक सलाहकार चुनाव के आख़िरी दिनों तक जीत को लेकर आशावादी बने रहे, जबकि यह साफ़ होता जा रहा था कि पार्टी हार की ओर बढ़ रही है.

अब चुनाव में हार की समीक्षा के बीच रिपब्लिकन पार्टी के कई नेताओं ने कहा है कि वे 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी पर ध्यान देना चाहते हैं.

आयोवा में रिपब्लिकन पार्टी के नेशनल कमिटीमैन स्टीव शेफ़लर ने कहा, “चाहे वह जेडी वेंस हों, मार्को रुबियो हों या टेड क्रूज़, हमारे पास कई अच्छे विकल्प हैं. मुक़ाबला पूरी तरह खुला होगा.”

रिपब्लिकन रणनीतिकार ग्रेग पेपिन ने कहा कि मिडटर्म चुनावों के नतीजे दिखाते हैं कि पार्टी को नई दिशा की ज़रूरत है.

उन्होंने कहा, “मुझे पूरी उम्मीद है कि हम ट्रंप के दौर को पीछे छोड़ चुके हैं और आगे पार्टी में नए चेहरे, नए मुद्दे और नई प्राथमिकताएं होंगी.”

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