इमेज कैप्शन, ट्रंप ने कहा है कि उनके प्रतिनिधि कल शाम तक पाकिस्तान पहुंच सकते हैं
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया है कि उनके प्रतिनिधि ईरान के साथ बातचीत के लिए पाकिस्तान जा रहे हैं.
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया, “मेरे प्रतिनिधि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद जा रहे हैं. वे कल शाम बातचीत के लिए वहां पहुंच जाएंगे.”
ट्रंप ने कहा, “हम एक बहुत ही सही और वाजिब डील का प्रस्ताव दे रहे हैं. मुझे उम्मीद है कि वे इसे मान लेंगे, क्योंकि अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो अमेरिका, ईरान के हर एक पावर प्लांट और हर एक पुल को तबाह कर देगा.”
ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर अब बातचीत नाकाम रहती है, तो “अब और कोई नरमी नहीं बरती जाएगी.”
ट्रंप ने कहा कि ईरान के पुल और पावर प्लांट “बहुत तेज़ी से और आसानी से गिरा दिए जाएंगे.”
अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर “युद्धविराम समझौते का उल्लंघन” करने का आरोप भी लगाया है. इसकी वजह ईरान की ओर से शनिवार को होर्मुज़ स्ट्रेट पर गोलियां चलाना है.
ट्रंप ने कहा, “यह अच्छा नहीं था, है ना?, ईरान का कहना था कि गोलियां एक फ़्रांस के जहाज और ब्रिटेन के एक मालवाहक जहाज को निशाना बनाकर चलाई गईं.”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्ट्रेट को बंद करने के ईरान के फैसले को “अजीब” बताया है. ट्रंप का कहना है कि ये इसलिए अजीब है क्योंकि अमेरिकी नाकाबंदी ने “होर्मुज़ स्ट्रेट पहले ही बंद कर रखा है.”
ट्रंप ने कहा, “वे अनजाने में हमारी मदद कर रहे हैं. इस मार्ग के बंद होने से उन्हीं को नुकसान हो रहा है. हर दिन 50 करोड़ डॉलर! अमेरिका को इससे कोई नुकसान नहीं होता.”
वहीं ईरान ने अमेरिका पर यह आरोप भी लगाया है कि उसने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी लगाकर संघर्ष-विराम की शर्तों का उल्लंघन किया है.
इससे पहले पाकिस्तान में जिस तरह की तैयारियां चल रही थी उससे ऐसा लगने लगा था कि ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर बातचीत हो सकती है.
बीबीसी उर्दू के मुताबिक़ पाकिस्तानी नेताओं के राजनयिक प्रयार जारी थे. इसके साथ ही ट्रंप ने भी कहा था कि समझौता होगा तो वो पाकिस्तान जाने को तैयार हैं.
बीबीसी उर्दू के मुताबिक़ रविवार को इस्लामाबाद के विशाल पांच सितारा मैरियट होटल के मैनेजमेंट ने अपने मेहमानों को रविवार दोपहर तीन बजे तक होटल खाली करने का निर्देश दिया था.
इसके अलावा रावलपिंडी और इस्लामाबाद के उपायुक्तों ने रविवार से अगले आदेश तक सार्वजनिक परिवहन और माल ढुलाई पर रोक लगा दी थी.
पहली बातचीत रही थी नाकाम
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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान में 11 और 12 अप्रैल को ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत टूटने का एलान अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया था
ईरान और अमेरिका के बीच 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई बातचीत नाकाम रही थी.
अमेरिका की ओर से बातचीत का नेतृत्व करने वाले उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा थी बातचीत सफल नहीं रही. उन्होंने कहा था अमेरिका ने ईरान को अपना फ़ाइनल ऑफर दे दिया है और इसके बाद वो स्वदेश लौट गए थे.
इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे चली बातचीत बिना किसी नतीजे के ख़त्म हो गई थी.
जेडी वेंस ने कहा था कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच फ़ासला कम करने और समझौता कराने की पूरी कोशिश की, लेकिन “बुरी ख़बर यह है कि हम किसी समझौते तक नहीं पहुंच सके.”
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह ख़बर अमेरिका के लिए उतनी बुरी नहीं है जितनी ईरान के लिए है, “कोई समझौता नहीं हुआ है और हम अमेरिका वापस लौट रहे हैं.”
पाकिस्तान के कहने पर अमेरिका और ईरान दो हफ़्ते के संघर्ष विराम पर राज़ी हुए थे और दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंचे थे.
अमेरिका और ईरान शांति वार्ता की नाकामी के लिए अलग-अलग वजहें बता रहे थे.
न्यूक्लियर एनरिच्मेंट बातचीत में बड़ी अड़चन
बीबीसी के सुरक्षा मामलों के संवाददाता फ़्रैंक गार्डनर के मुताबिक ईरान का न्यूक्लियर एनरिच्मेंट बातचीत में एक बड़ी अड़चन बना हुआ है.
फ़्रैंक गार्डनर के मुताबिक, “ईरान चाहता है कि उस पर लगे प्रतिबंध हटा दिए जाएं. उसकी अर्थव्यवस्था बहुत बुरे दौर से गुज़र रही है. अब तो हालात और भी बदतर हो गए हैं, क्योंकि वह खाड़ी क्षेत्र में स्थित अपने बंदरगाहों से अपना निर्यात बाहर नहीं भेज पा रहा है.”
“समय भी ईरान के पक्ष में नहीं है.”
उन्होंने कहा, “अमेरिका और ईरान दो मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं: पहला न्यूक्लियर एनरिच्मेंट. दूसरा वो अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम, जो अभी भी इस्फ़हान के पहाड़ों के नीचे बनी सुरंगों में मौजूद है, ठीक उसी जगह, जहां पिछले साल अमेरिका ने बमबारी की थी.”
फ़्रैंक गार्डनर के मुताबिक, “इसे बाहर निकालने की कोशिश में एक विशेष अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन भेजने के बारे में बहुत सी मनगढ़ंत बातें की गई हैं. लेकिन इसके बारे में बात करने का कोई मतलब नहीं है. ईरान उस जगह को अपनी सेना से घेर लेगा.”
“आप उसकी अनुमति के बिना ऐसा नहीं कर सकते. बमबारी से तबाह हुई सुरंगों के अंदर उतरना एक बहुत ही नाज़ुक ऑपरेशन होगा.”
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था, अंतरर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ऐसा करने के लिए तैयार है. लेकिन गोलीबारी के बीच नहीं. यह अमेरिका के साथ एक संयुक्त मिशन हो सकता है, लेकिन तभी जब ईरान इसके लिए राज़ी हो.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित