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आईबीजी, शक्तिमान और दिव्यास्त्र यूनिट्स… भविष्य की लड़ाइयों के लिए खुद को कैसे बदल रही भारतीय सेना

Byadmin

Jun 30, 2026


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय सेना खुद को अधिक चुस्त, घातक और तकनीक-आधारित लड़ाकू बल बनाने के लिए एक बड़े संरचनात्मक बदलाव से गुजर रही है। आधुनिकीकरण अभियान के हिस्से के रूप में, सेना भविष्य के संघर्षों से निपटने के लिए डॉक्ट्रिनल बदलाव लागू कर रही है और नए फॉर्मेशन्स, यूनिट्स व सब-यूनिट्स का गठन करने की योजना बना रही है।

आने वाले समय में इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स, शक्तिबाण रेजिमेंट्स, दिव्यास्त्र बैटरियों और अश्नि प्लेटूनों की संभावित शुरुआत यह दर्शाती है कि सेना अब पुराने और भारी-भरकम पारंपरिक फॉर्मेशन्स से पीछे हट रही है। इसकी जगह अब ऐसे फुर्तीले और तकनीक-सक्षम कॉम्बैट यूनिट्स पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जो तेजी से तैनात होने और सटीक हमले करने में पूरी तरह सक्षम हों।

सेना के इस बदलाव का मुख्य केंद्र

इस पूरे बदलाव के मूल में आईबीजी हैं। इन्हें लगभग 5,000 सैनिकों वाले फुर्तीले, ब्रिगेड के आकार के फॉर्मेशन्स के रूप में डिज़ाइन किया गया है। ये आत्मनिर्भर इकाइयां हैं जो इन्फैंट्री यानी पैदल सेना, आर्मर यानी टैंक और बख्तरबंद गाड़ियां, आर्टिलरी यानी तोपखाना, इंजीनियर्स, सिग्नल्स और एयर डिफेंस को एक साथ जोड़ती हैं।

खतरे, इलाके और कार्य के हिसाब से तैयार किए गए ये आईबीजी 12 से 48 घंटों के भीतर मोबिलाइज हो सकते हैं और संवेदनशील सीमाओं पर तुरंत निर्णायक हमले कर सकते हैं। 9 कोर और 17 स्ट्राइक कोर के तहत इनका गठन, पाकिस्तान और चीन दोनों के खिलाफ धीमी डिविजनल संरचनाओं के बजाय लचीले स्ट्राइक फोर्स तैनात करने के भारत के इरादे को साफ दिखाता है।

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शक्तिबाण, दिव्यास्त्र और ड्रोन-सक्षम यूनिट्स की जुगलबंदी

इस नई व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए विशेष ड्रोन-सक्षम इकाइयों को शामिल किया जा रहा है जिसमें शक्तिबाण रेजिमेंट में स्वाम ड्रोन, लॉइटरिंग म्यूनिशन्स और लंबी दूरी के यूएवी को एकीकृत करेगी। इसके जरिए सामरिक मोर्चों से लेकर दुश्मन के इलाके में गहराई तक जाकर अभियानों को अंजाम दिया जा सकेगा।

दिव्यास्त्र बैटरी यूनिट ड्रोनों को आर्टिलरी किल वेब में शामिल करेगी, जिससे निगरानी, लक्ष्य की पहचान और सटीक हमला करने की क्षमता में जबरदस्त इजाफा होगा।

नेटवर्क-केंद्रित युद्ध रणनीति की शुरुआत

ये तमाम नवाचार मिलकर सेना की युद्धक क्षमता के पुनर्गठन को दर्शाते हैं। अपने फॉर्मेशन्स में तकनीक, संयुक्तता और गति को शामिल करके भारत अब जनशक्ति-प्रधान रणनीतियों से हटकर नेटवर्क-केंद्रित युद्ध की ओर बढ़ रहा है।

यह बदलाव एक व्यापक दृष्टिकोण को प्रदर्शित करता है यानी एक ऐसा बल तैयार करना जो न केवल आकार में बड़ा हो, बल्कि डिजाइन में अधिक स्मार्ट हो, और बहु-आयामी खतरों का जवाब फुर्ती व सटीकता से दे सके।

भविष्य की चुनौतियों के लिए सैन्य पुनर्गठन

यह संरचनात्मक बदलाव भारतीय सशस्त्र बलों के नए रणनीतिक ओरिएंटेशन की दिशा में एक निर्णायक कदम है। अक्सर कहा जाता है कि एक सेना हमेशा पिछला युद्ध लड़ने की तैयारी करती है, लेकिन यहां तस्वीर बिल्कुल अलग है।

भारतीय सेना भविष्य में पैदा होने वाली संभावित चुनौतियों का सामना करने के लिए खुद को नए सिरे से तैयार कर रही है। ये कदम यह सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य के संघर्षों का सामना ऐसे फॉर्मेशन्स के साथ किया जाए जो अधिक तेज, बेहतर एकीकृत और तकनीकी रूप से सशक्त हों।

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