राज्य ब्यूरो, कोलकाता। राज्य में निर्माण सामग्री की आसमान छूती कीमतों और बिचौलियों के आतंक से परेशान प्रधानमंत्री आवास योजना के गरीब लाभार्थियों के लिए राज्य सरकार ने एक अहम निर्णय लिया है।
सरकार ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में मकान बना रहे गरीब परिवारों को बाजार दर से काफी कम कीमत पर सीधे रेत (बालू) उपलब्ध कराने की मुकम्मल व्यवस्था की है।
इस जनकल्याणकारी योजना को धरातल पर उतारने के लिए विस्तृत सर्वेक्षण का काम पूरा कर लिया गया है, और आगामी माह से प्राथमिक तौर पर बीरभूम जिले के लगभग 11 ब्लॉकों में इस नई व्यवस्था की शुरुआत कर दी जाएगी, जिसे बाद में क्रमिक रूप से पूरे राज्य में लागू करने की योजना है।
बीरभूम के सूरी-एक ब्लाक में आयोजित एक जन कल्याण शिविर को संबोधित करते हुए राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री व जिले विधायक जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने इसकी आधिकारिक घोषणा की।
इस दौरान पारदर्शी व्यवस्था का उल्लेख करते हुए मंत्री ने चौकाने वाले आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि सिंडिकेट राज और ‘फर्जी चालान’ के खिलाफ मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बाद प्रशासनिक मुस्तैदी का नतीजा है कि बीरभूम के महज 10 पत्थर चेक गेटों से पिछले एक महीने (17 मई से 16 जून) के भीतर 72 करोड़ 78 लाख रुपये का रिकार्ड राजस्व सरकारी खजाने में जमा हुआ है।
बकरीद के त्योहार की छुट्टियों के कारण इस राजस्व में थोड़ी कमी देखी गई, अन्यथा आगामी महीनों में इस आंकड़े के 100 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक मील के पत्थर को छूने का पूरा अनुमान है।
पिछली सत्ता पर भ्रष्टाचार का सीधा आरोप मढ़ते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि पहले के दौर में जब भी चुनाव आते थे, तो विकास का पैसा सरकारी तंत्र से लूटकर सीधे तृणमूल कांग्रेस के कोष में डाइवर्ट कर दिया जाता था, जिसके कारण मासिक राजस्व संग्रह महज नौ से 22 करोड़ रुपये के बीच सिमट कर रह जाता था।
मंत्री ने अवैध कारोबारियों को सख्त चेतावनी दी कि जो भी अवांछित तत्व ट्रकों में पत्थरों के ऊपर धूल की परत बिछाकर टैक्स चोरी या अवैध तस्करी का प्रयास करेंगे, उन्हें पकड़े जाने पर दोगुना जुर्माना भरना पड़ेगा।