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‘इतना भयानक सूखा कभी नहीं देखा’: लातूर में कैसे हैं हालात? ग्राउंड रिपोर्ट

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Oct 29, 2026


फ़सल ख़राब होने का दर्द दामोदर चव्हाण के चेहरे पर साफ दिखता है .

इमेज कैप्शन, सूखे के कारण फ़सल ख़राब होने का दर्द दामोदर चव्हाण के चेहरे पर साफ़ दिखता है

    • Author, श्रीकांत बंगाले
    • पदनाम, बीबीसी मराठी संवाददाता
  • प्रकाशित

  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

“पहले भी कई बार सूखा पड़ा है, लेकिन ऐसा सूखा कभी नहीं देखा. इतना भयानक सूखा हमने पहले कभी नहीं देखा.”

“हमने 1972 का सूखा भी देखा था. उस साल पोला त्योहार की पारंपरिक पूजा के बाद बारिश हो गई थी. इसलिए हमें सूखे का असर उतना महसूस नहीं हुआ. लेकिन इस साल का सूखा… हे भगवान!”

इतना कहते हुए दामोदर चव्हाण आसमान की तरफ़ देखते हैं और प्रार्थना करते हुए हाथ जोड़ लेते हैं. उनकी बातें और अनुभव बताते हैं कि इस साल के सूखे ने लोगों को किस क़दर प्रभावित किया है.

75 साल के दामोदर चव्हाण लातूर ज़िले की रेणापुर तहसील के गरसुली गांव में रहते हैं. बारिश न होने के कारण उनके दो एकड़ खेत में लगी सोयाबीन की फ़सल सूख गई है.

‘कमाई से ज़्यादा खेती की लागत’

बारिश न होने के कारण गरसुली गांव में सोयाबीन की फ़सल की यह हालत हो गई है.

इमेज कैप्शन, बारिश न होने के कारण गरसुली गांव में सोयाबीन की फ़सल की यह हालत हो गई है

चव्हाण कहते हैं, “डेढ़ से दो महीने से बारिश नहीं हुई है. बीच-बीच में बस हल्की बारिश हुई. गांव में बारिश होती है, लेकिन खेतों में नहीं होती. इधर होती है, उधर नहीं होती. यही स्थिति है.”

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