जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ 28 फरवरी को सैन्य अभियान शुरू किया था और युद्ध के 40वें दिन दो हफ्ते के लिए युद्धविराम हुआ था, जो बुधवार को समाप्त हो रहा है।
यह सैन्य अभियान ईरान को परमाणु हथियार संपन्न देश बनने से रोकने के लिए शुरू किया था, लेकिन वह भले अब परमाणु हथियार पाने से बहुत दूर हो गया हो, लेकिन उसके पास अब भी एक ऐसा हथियार है, जिसके दम पर वह अमेरिका की शर्तों के आगे झुक नहीं रहा है। वह नया हथियार होर्मुज स्ट्रेट है।
दशकों से अमेरिका, यूरोप और इजरायल को यह बात परेशान करती रही है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने में जुटा है। यह तर्क दिया जाता रहा है कि अगर तेहरान परमाणु हथियार हासिल कर लेगा तो अन्य क्षेत्रीय शक्तियां जैसे सऊदी अरब, मिस्त्र और तुर्किये भी यह शक्ति पाने की दौड़ में शामिल हो सकते हैं।
हालिया युद्ध के दौरान अमेरिका ने कई बार उसके परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया था। युद्धविराम के बाद अमेरिकी राष्ट्रपतडोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा किया था कि ईरान संर्वधित यूरेनियम अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार हो गया है।
हालांकि ईरान ने ट्रंप के दावे को झूठा करार दिया और कहा कि वह संवर्धित यूरेनियम नहीं सौंपेगा। लेकिन इन सबके बीच एक बात निकलकर सामने आई कि क्या वास्तव में ईरान को परमाणु हथियार की जरूरत है, क्योंकि उसके पास होर्मुज स्ट्रेट है।
तेहरान ने युद्ध के दौरान इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को बंद कर दिया था, जिससे दुनियाभर में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति में भारी कमी को महसूस किया जा रहा है। कई देशों में ईंधन की किल्लत हो गई है। यह समस्या अब भी बरकरार है।
क्यों अहम है होर्मुज
होर्मुज के महत्व को इसी बात से समझा जा सकता है कि वैश्विक तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी जलमार्ग से गुजरता है। होर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। होर्मुज पर भौगोलिक रूप से ईरान ओर ओमान का नियंत्रण है। यह अपने सबसे संकरे ¨बदु पर 33 किमी चौड़ा है।
ऊर्जा आपूर्ति पर असरयुद्ध से पहले हर दिन 100 से 135 जहाज होर्मुज से गुजरते थे, जिनके जरिये दो करोड़ से ढाई करोड़ बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति होती थी। इसमें से ज्यादातर आपूर्ति भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और अन्य एशियाई देशों के लिए होती थी। होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बंद होने से ये देश ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
आर्थिक मोर्चे पर यह अनुमान
पिछले महीने अमेरिकी वित्तीय सेवा कंपनी मार्निंगस्टार ने कहा था कि वैश्विक नुकसान 330 अरब डालर से लेकर 2.2 ट्रिलियन तक हो सकता है, जो इस बात पर निर्भर करेगा कि युद्ध कितना लंबा चलता है और कामकाम कितना प्रभावित होता है।