• Sat. Aug 22nd, 2026

24×7 Live News

Apdin News

उड़ान योजना के विस्तार के लिए 28,840 करोड़ का निवेश, राम मोहन नायडू बोले- क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर रहेगा जोर

Byadmin

Aug 22, 2026


आईएएनएस, नई दिल्ली। नागरिक उड्डयन मंत्री किन्जरापु राम मोहन नायडू का कहना है कि केंद्र सरकार उड़ान परियोजना के अगले चरण के तहत 28,840 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ इस महत्वाकांक्षा को नए स्तर पर ले जा रही है।

‘उड़ान’ के अगले चरण का उद्देश्य क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करना, फ्लाइंग ट्रेनिंग आर्गनाइजेशन पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार करना व इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी (आइजीआरयूए) का रूपांतरण करना था।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय की संसदीय परामर्श समिति की बैठक शुक्रवार को कर्नाटक के मैसूरु में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता नागरिक उड्डयन मंत्री किन्जरापु राम मोहन नायडू ने की।

मंत्री ने समिति को संबोधित कर कहा, “पिछले 10 वर्षों में हवाई अड्डे के विकास और एयरलाइनों के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग में लगभग 10,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है।”

नायडू ने कहा कि भारत की उड्डयन वृद्धि अब प्रमुख स्थलों से आगे बढ़ रही है और केवल हवाई अड्डों के विकास तक सीमित नहीं है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उड़ान के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर उड्डयन क्षेत्रीय विकास व समावेशी आर्थिक वृद्धि का एक इंजन बनता जा रहा है, जिससे किसानों, निर्यातकों, व्यवसायों व समुदायों को लाभ हो रहा है।

भारत ड्रोन और ईविटोल्स के माध्यम से उड्डयन नवाचार की अगली लहर का नेतृत्व कर रहा है, जबकि एमआरओ और एयर कार्गो जैसे क्षेत्रों में सुधार को आगे बढ़ा रहा है।

समिति को प्रशिक्षित पायलटों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए फ्लाइंग ट्रेनिंग आर्गनाइजेशन (एफटीओ) पारिस्थितिकी तंत्र में सुधारों के बारे में भी जानकारी दी गई।

एफटीओ पारिस्थितिकी तंत्र 2020 में 32 एफटीओ से बढ़कर 2026 में 41 हो गया है, जबकि उड़ान आधार 32 से बढ़कर 63 हो गए हैं। एफटीओ रैंकिंग ढांचे की शुरुआत ने पारदर्शी जवाबदेही को सक्षम किया है, जिससे युवाओं को पायलट बनने के पहले कदम पर निर्णय लेने में मदद मिल रही है।

उड्डयन क्षेत्र में अवसरों पर मंत्री ने कहा, “भारतीय एयरलाइनों ने दुनिया में कहीं भी अभूतपूर्व स्तर पर विमान के आर्डर दिए हैं। लेकिन विमान के आर्डर केवल कहानी का एक हिस्सा हैं; इन विमानों को उड़ाने के लिए एक कुशल और सुरक्षा-चेतन कार्यबल की आवश्यकता होगी। हम भारत की उड्डयन वृद्धि को संचालित करने के लिए कार्यबल का आयात नहीं करना चाहते। हम उस कार्यबल को यहीं भारत में प्रशिक्षित करना चाहते हैं।”

समिति ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी (आइजीआरयूए) के रूपांतरण पर भी चर्चा की, जिसमें विमान के उपयोग में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है, जो प्रति विमान वार्षिक औसतन 1,765 उड़ान घंटे है, जो वैश्विक मानक लगभग 1,500 घंटों से अधिक है। इस संस्थान ने दो दशकों से अधिक समय के बाद पहली बार बजट अधिशेष भी प्राप्त किया है।

By admin