डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (एफआईपी) ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से अनुरोध किया है कि एअर इंडिया की उड़ान एआई171 के हादसे की जांच रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले उसके तकनीकी सबमिशन पर औपचारिक रूप से विचार किया जाए।
एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) 12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुए इस हादसे की जांच के अंतिम चरण में है। इस हादसे में 260 लोगों की मौत हो गई थी।
शुक्रवार को नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू को लिखे पत्र में एफआईपी ने कहा कि उसे एआई171 की ड्राफ्ट फाइनल जांच रिपोर्ट की समीक्षा में स्वतंत्र तकनीकी भागीदार के रूप में नामित किया जाए।
एफआईपी ने बताया कि उसे विश्वसनीय जानकारी मिली है कि सरकार या मंत्रालय ड्राफ्ट रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले किसी स्वतंत्र समिति से जांच कराने पर विचार कर रहा है या निर्देश दे चुका है।
संघ ने कहा कि अगर ऐसी समीक्षा व्यवस्था बनाई जा रही है, तो पायलट समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले स्वतंत्र तकनीकी हितधारक के रूप में उसे औपचारिक रूप से शामिल किया जाए। साथ ही, उसके तकनीकी सबमिशन पर अंतिम रिपोर्ट जारी होने से पहले औपचारिक और दस्तावेजी विचार किया जाए।
पिछले सप्ताह भी एफआईपी ने एएआईबी से अनुरोध किया था कि बोइंग 787 विमान से जुड़े इलेक्ट्रिकल सिस्टम के सबूतों का व्यापक मूल्यांकन एआई171 जांच का हिस्सा बनाया जाए।
एयर इंडिया का बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर (रजिस्ट्रेशन वीटी-एएनबी) 12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन गैटविक के लिए उड़ान भरने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। विमान में सवार 242 लोगों में से 241 की मौत हो गई, जबकि जमीन पर भी 19 लोग मारे गए। सभी 12 क्रू सदस्यों की मौत हुई और एक यात्री बच गया।
यह विमान 2013 में बना था और जीई इंजन से लैस था। इसने 41,868 घंटे उड़ान भरी थी। इसका एयरवर्थिनेस रिव्यू सर्टिफिकेट 23 मई 2026 तक वैध था।