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एक सड़क हादसे ने महक की ज़िंदगी व्हीलचेयर पर पहुंचा दी, लेकिन उनका ये सपना नहीं बदला

Byadmin

Oct 23, 2026


एक सड़क दुर्घटना के बाद महक बिना सहारे के चल नहीं पाती हैं

इमेज कैप्शन, एक सड़क दुर्घटना में स्पाइन में लगी चोट के बाद महक बिना सहारे के चल नहीं पाती हैं

एक रैंडम दिन जीवन में वो सब कुछ बदल सकता है, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल होता है.

महक के लिए यही वो रैंडम पल था 22-23 मार्च, 2022 की दरमियानी रात. वो अपने परिवार के साथ यूपी के ग़ाज़ियाबाद से अपने होमटाउन गोरखपुर जा रही थीं.

उनके पापा गाड़ी चला रहे थे, सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय हो चुकी थी, महज 20-30 किमी का सफर बाकी था, तभी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया.

पहली नज़र में परिवार को लगा कि वे सभी हादसे में बाल-बाल बच गए, लेकिन महक ने तभी अपनी मम्मी से कहा, “मुझे अपने पैर महसूस नहीं हो रहे.”

महक कहती हैं कि जो चला गया है, वो वापस नहीं लौट सकता है, ऐसे में मलाल तो है लेकिन ज़िंदगी आगे देखने का नाम है

इमेज कैप्शन, महक कहती हैं कि जो चला गया है, वो वापस नहीं लौट सकता है. ऐसे में मलाल तो है लेकिन ज़िंदगी आगे देखने का नाम है

महक की उम्र तब 16 साल थी, वो नौवीं क्लास की स्टूडेंट थीं, पढ़ाई में तेज-तर्रार होने के साथ ही कथक करती थीं, फ़ुटबॉल खेलती थीं, ड्रॉइंग बनाती थीं और कहानियां भी लिखती थीं. वो दिल की डॉक्टर यानी कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहती थीं.

वीडियो कैप्शन, शरीर साथ छोड़ रहा था, लेकिन दिल हार मानने को तैयार नहीं था’, एक लड़की के NEET पास करने की कहानी

अस्पताल के चक्कर

सड़क हादसे के बाद महीनों तक महक का इलाज चलता रहा

इमेज कैप्शन, सड़क हादसे के बाद महीनों तक महक का इलाज चलता रहा

प्रीति सिंह कहती हैं कि ऐसा ही एक झटका परिवार को तब लगा था जब कुछ साल पहले महक के पापा को कैंसर होने का पता चला था, परिवार ने काफी संघर्ष कर उससे बाहर निकला था और अब यह.

महक के पिता कहते हैं, “पहले तो मुझे लगता था कि मेरा जीवन ज़्यादा नहीं है लेकिन अब मुझे महक के लिए जीना था. कई बार ये सवाल मन में आता है कि उस गाड़ी में मैं भी बैठा था, मुझे कुछ नहीं हुआ लेकिन महक के साथ ऐसा क्यों हो गया?”

महक के परिवार के लिए ये कई तरह की परेशानियों वाले दिन थे, अस्पताल का चक्कर था, इलाज के लंबे-चौड़े खर्चे थे, फिजियोथेरेपी के सेशन्स थे. जीवन कहीं उम्मीद और नाउम्मीदी के बीच में था. परिवार ने इन्हीं दोनों के बीच अपने लिए जीवन तलाशना शुरू कर दिया.

हादसे के बाद से महक अपने होमटाउन में ही थीं. उनकी मां बताती हैं कि पहले तो उनके मन में महक की पढ़ाई का ख़्याल ही नहीं आया था, उनके लिए पहली चुनौती ये थी कि महक भले अभी खड़ी न हो सके लेकिन कम से कम बिस्तर पर बैठ तो सके.

डॉक्टर्स की मदद से जब ऐसा संभव हुआ तो उन्हें लगा कि महक अपने दोस्तों से मिलती-जुलती रहे तो वो थोड़ी खुश रहेगी, इसलिए उन्होंने उसे दोबारा स्कूल भेजने का फ़ैसला किया.

डॉक्टर बनने का सपना फिर आकार लेने लगा

अपने पैरेंट्स और भाई के साथ महक

इमेज कैप्शन, अपने पैरेंट्स और भाई के साथ महक

महक कहती हैं कि एक्सीडेंट के बाद पढ़ाई के टेबल पर लौटना मुश्किल था. उनके लिए बिस्तर ही एक पूरी दुनिया हो गई थी. 10वीं का बोर्ड देने और फिर 11वीं आते-आते उन्हें लगने लगा था कि अब वो वैसी स्टूडेंट नहीं हैं जो हमेशा टीचर्स और पैरेंट्स की उम्मीद से ज़्यादा अच्छा करती थीं.

वो बताती हैं, “किसी एग्जाम का रिजल्ट आता था तो मुझे लगता था कि मैं ज़्यादा नंबर लाने वाली से कब ऐसी लड़की बन गई जो मुश्किल से परीक्षा पास कर पा रही है. मेरे लिए ये एक सदमे से ज़्यादा था, मैं इसको लेकर रोती रहती थी, मैं जब पहले पढ़ती थी तो बीच-बीच में जाकर पार्क में खेलती थी, दोस्तों से मिलती थी, लेकिन अब वो चीज हो ही नहीं पा रही थी. ”

“मैं मुश्किल से रोशनी देखने के लिए बालकनी तक जा पा रही थी, पढ़ रही थी, लेट जा रही थी, मुझे सिर्फ़ फ़ोन से ही बाहर की दुनिया का पता चल पाता था.”

महक कहती हैं कि वो अपने खाली समय में कहानियां भी लिखती हैं
इमेज कैप्शन, महक कहती हैं कि वो अपने खाली समय में कहानियां भी लिखती हैं

महक के लिए वापसी करना आसान नहीं था.लेकिन उनके ख्वाब उन्हें हौसला देते रहे. बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना था. उसके लिए खूब पढ़ना था. ये सपना पूरा करने के लिए नीट की परीक्षा देनी थी, जिसमें लाखों स्टूडेंट बैठते हैं. ये सब आसान नहीं रहने वाला था.

लेकिन महक कहती हैं कि उस सड़क हादसे के बाद उनके लिए कुछ भी कहां आसान रह गया था, वो एक दिनचर्या जिसमें जिन कामों को करने के लिए सोचने की भी ज़रूरत नहीं पड़ती थी, अब एक टूथब्रश भी गिर जाए तो उसे उठाने के लिए भी जद्दोजहद थी.

वो कहती हैं कि जब उनसे मिलने वाले लोग उन्हें यह सलाह देते थे कि मज़बूत इच्छाशक्ति के साथ रहो तो उन्हें ये ऐसा ज्ञान जैसा लगता था लेकिन अंत में यही बात थी कि उन्हें इरादे मज़बूत ही करने थे. और उन्होंने किया भी.

बिस्तर पर दीवार की टेक लेकर बैठने और घंटों पढ़ाई करने वाली महक ने 2026 की नीट परीक्षा पास कर ली है, उनका उत्तर प्रदेश के देवरिया में महर्षि देवराहा बाबा मेडिकल कॉलेज में दाखिला भी मिल गया है.

महक के पापा सत्येंद्र प्रताप सिंह कहते हैं कि वो चाहते हैं कि महक आगे चलकर जब डॉक्टर बने तो स्पाइन पर रिसर्च करे लेकिन महक अब भी कार्डियोलॉजिस्ट ही बनना चाहती हैं.

महक की मां प्रीति सिंह कहती हैं कि उन्हें इस बात की खुशी है कि महक का दाखिला हो गया है, थोड़ी घबराहट भी है कि वो कैसे सब कुछ मैनेज करेंगी लेकिन ये इत्मीनान है कि आगे का रास्ता महक बना ही लेगी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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