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एफ़सीआरए क़ानून में संशोधनों के प्रस्ताव को अमेरिकी सांसद ने बताया ‘ईसाई विरोधी’, क्या है पूरा मामला?

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Aug 8, 2026


मिशनरी ऑफ़ चैरिटी के हेडक्वार्टर में मार्को रुबियो और भारत में अमेरिका के राजदूत

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, इस साल मई में जब अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत का दौरा किया था तो वो कोलकाता स्थित मिशनरी ऑफ़ चैरिटी के हेडक्वार्टर गए थे.

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अमेरिका के सांसद राइली मूर ने भारत के विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफ़सीआरए) के प्रस्तावित संशोधनों को ईसाइयों पर हमला बताया और इसे ‘भारत और अमेरिका के रिश्तों के लिए सबसे बड़ी चिंता’ बताई.

एफ़सीआरए क़ानून ग़ैर सरकारी संगठनों (एनजीओ), सिविक सोसाइटी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और धार्मिक संस्थाओं को मिलने वाले विदेशी चंदे को कंट्रोल करता है.

एफ़सीआरए के विवादास्पद प्रस्तावित संशोधनों पर भारत के ईसाई संगठनों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है और इसे विचार विमर्श के बाद ही पेश करने की मांग की है.

मिज़ोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाक़ात के बाद कहा कि यह संशोधित प्रस्ताव संसद में 12 अगस्त को पेश होगा.

लालदुहोमा ने संसद परिसर में पत्रकारों से कहा, “हमने नए एफ़सीआरए विधेयक को लेकर अपनी आशंकाएं गृह मंत्री के सामने रखीं. उन्होंने हमें भरोसा दिलाया कि यह कानून पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव) से लागू नहीं होगा.”

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