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भारत ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के बयान पर कड़ा जवाब दिया.
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, “लगातार आतंकवाद फैलाने वाला देश आतंकवाद को सामान्य बताने और उसके नतीजों से बचने की कोशिश करता है, तो यह स्वीकार नहीं किया जाएगा.”
दरअसल, एक दिन पहले ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने न्यूयॉर्क में चल रही यूएन जनरल असेंबली में कहा था कि दक्षिण एशिया को 2025 जैसे संघर्ष से दोबारा बचाने के लिए कश्मीर मुद्दे का “न्यायपूर्ण और निष्पक्ष समाधान” ज़रूरी है.
उन्होंने कहा था कि भारत का सिंधु जल संधि को स्थगित रखना कानूनी आधार नहीं रखता. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर भारत पाकिस्तान के हिस्से के सिंधु नदी के पानी को रोकता, बाधित करता या मोड़ता है, तो इसे “युद्ध की कार्रवाई” माना जाएगा.
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान की प्रतिक्रिया का जवाब देते हुए कहा, “कल आतंकवाद को लगातार अंजाम देने वाले एक देश ने इस महासभा के सामने तथ्यों को ग़लत तरीके से पेश किया.”
जयशंकर ने पाकिस्तान या प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ का नाम नहीं लिया.
जयशंकर ने कहा, “हमें आतंकवाद के ख़िलाफ़ अपनी रक्षा करने का अधिकार है और हम इसका इस्तेमाल करेंगे.”
उन्होंने कहा कि “दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ नहीं चल सकते.”
उन्होंने कहा, “ऐसी किसी समझ या रिश्ते पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है, जो आतंकवाद के साथ रहते हुए बनाए जाएं. आतंकवाद को अंजाम देने वाले को अपने तौर-तरीके बदलने होंगे.”
जयशंकर ने दुनिया के नेताओं से कहा कि शांति के लिए लगातार बना हुआ एक बड़ा ख़तरा आतंकवाद है.
उन्होंने कहा, “अगर किसी देश की तरफ़ से आतंकवाद को समर्थन दिया जाता है और उसका मक़सद सीमा पार तक फैला हुआ है, तो यह सीधे तौर पर वैश्विक व्यवस्था के ख़िलाफ़ है.”
भारत ने ऐसे काम करने वाली सरकारों को जवाबदेह ठहराने की मांग की. जयशंकर ने कहा, “आतंकवाद के ख़िलाफ़ हमारी ज़ीरो-टॉलरेंस की नीति में कोई ढील नहीं होनी चाहिए. ख़ास तौर पर आतंकवाद के वित्तीय स्रोतों को सामने लाना और उन पर रोक लगाना ज़रूरी है.”
शहबाज़ शरीफ़ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के दौरान 2025 में भारत के साथ हुए संघर्ष में “समय पर दख़ल” देने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को श्रेय दिया था.