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कच्चे तेल की क़ीमत कम होने के बावजूद भारत सरकार ये फ़ायदा उपभोक्ताओं को क्यों नहीं दे रही है

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Jun 27, 2026


पेट्रोल

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय क़ीमतें ईरान जंग के पूर्व के स्तर से भी नीचे पहुंच गई हैं (सांकेतिक तस्वीर)

तेल की क़ीमतें ईरान जंग शुरू होने से पहले के स्तर पर लौट आई हैं और माना जा रहा है कि इससे दुनिया के तीसरे सबसे बड़े कच्चे तेल आयातक भारत को बड़ी आर्थिक राहत मिल सकती है.

गुरुवार को वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड कुछ समय के लिए 72.48 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया. यह वही स्तर था, जो 28 फ़रवरी को अमेरिका और इसराइल के ईरान पर हमले शुरू करने से एक दिन पहले था. शुक्रवार को तेल की क़ीमतें और घटकर 72.60 डॉलर प्रति बैरल हो गईं.

बीते क़रीब चार महीनों में ईरान की जवाबी कार्रवाई से ऊर्जा क़ीमतों में तेज़ उतार-चढ़ाव देखा गया. ईरान ने प्रभावी रूप से होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद कर दिया था, जोकि तेल और गैस की आपूर्ति के लिए दुनिया का एक बेहद अहम समुद्री मार्ग है.

17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर होने के बाद से कच्चे तेल की क़ीमतों में लगातार गिरावट देखी जा रही है और बाज़ार के जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में तेल के दामों और गिरावट आ सकती है. हालांकि अभी बाज़ार हालात पर नज़र बनाए रखेगा.

ग़ौरतलब है कि ईरान जंग के दौरान तेल की क़ीमतों में 120 डॉलर प्रति बैरल तक उछाल आ गया था.

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