संयुक्त राष्ट्र के मंच पर रूस ने भारत का खुलकर समर्थन किया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में स्थायी सदस्यता के लिए रूस ने भारत की दावेदारी का समर्थन किया है। वहीं, रूस ने पश्चिमी देशों के लिए अतिरिक्त स्थायी सीटें आवंटित किए जाने का विरोध भी किया है।
लावरोव ने पश्चिमी देशों का विरोध क्यों किया?
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की 81वीं बैठक के दौरान कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार के तहत वैश्विक दक्षिण, खासकर एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाना चाहिए। लावरोव ने कहा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के तहत पश्चिमी देशों के लिए कोई अतिरिक्त सीट आवंटित नहीं की जानी चाहिए। खासकर जर्मनी और जापान के लिए, जो इस समय सैन्यवाद और बदले की भावना की राह पर हैं।
रूस ने यूएन में भारत के समर्थन में क्या कहा?
उन्होंने कहा, हम एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के पक्ष में हैं। हम स्थायी सीट के लिए ब्राजील और भारत की दावेदारी का समर्थन करते हैं। रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार के दौरान एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के प्रतिनिधित्व को बढ़ाया जाना चाहिए। रूस ने स्थायी सीट के लिए भारत और ब्राजील की दावेदारी का समर्थन किया है।
यूएनएससी का ढांचा कैसा, अभी कितने सदस्य देश हैं?
गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में कुल 15 देश शामिल हैं। इनमें से कुछ देशों की सदस्यता स्थायी है, जबकि कुछ अन्य देश अस्थायी सदस्य हैं। स्थायी सदस्यों में चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं। स्थायी सदस्यता इसलिए अहम है क्योंकि इस वैश्विक मंच पर इन पांच स्थायी सदस्य देशों के पास वीटो पावर है। यानी विशेषाधिकार या वीटो का इस्तेमाल करके स्थायी सदस्य अपना दबदबा बनाए रखते हैं। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर धौंस या रसूख का इस्तेमाल करने के लिए भी वीटो का इस्तेमाल होता आया है। अस्थायी सदस्यों का कार्यकाल दो वर्षों का होता है, जिनका चयन संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी यूएनजीए की बैठक में होता है। अस्थायी सदस्य के रूप में भारत पिछली बात वर्ष 2021-22 में यूएनएससी सदस्य बना था।