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केंद्र ने गंगा बाढ़ क्षेत्र की नई परिभाषा तय की, ‘निर्माण मुक्त क्षेत्र’ शब्द हटाया

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Aug 12, 2026


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गंगा और उसकी सहायक नदियों के “सक्रिय बाढ़ क्षेत्र” को फिर से परिभाषित किया है और बाढ़ के लौटने की अवधि (रिटर्न पीरियड) के आधार पर नियामक और चेतावनी क्षेत्र बनाए हैं।

जल शक्ति मंत्रालय ने सात अगस्त को जारी अधिसूचना के जरिये ‘गंगा नदी (पुनरुद्धार, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016’ में संशोधन किया है। इस अधिसूचना को 10 अगस्त को राजपत्र में प्रकाशित किया गया। गजट में प्रकाशन की तिथि से यह आदेश प्रभावी हो गया।

हालिया संशोधन में ‘निर्माण मुक्त क्षेत्र’ शब्द को हटा दिया गया है। इसके बजाय, कहा गया है कि गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारों और उनके बाढ़ संभावित क्षेत्र का रखरखाव इस तरह किया जाएगा कि प्रदूषण और दबाव कम किया जा सके।

साथ ही प्राकृतिक भूजल संचय के लिए जरूरी कदम उठाया जा सके। सरकार ने ‘सक्रिय बाढ़ क्षेत्र’ की एक विशिष्ट परिभाषा तय की है। इसका मतलब है-गंगा या उसकी सहायक नदियों का वह इलाका जो हर पांच साल में एक बार आने वाली बाढ़ के दौरान पानी में डूब जाता है।

नई परिभाषा में “बाढ़ क्षेत्र” ऐसे इलाके को कहा जाएगा, जहां पांच साल में एक बार से लेकर 25 साल में एक बार बाढ़ आती है। 25 साल में एक बार से लेकर 100 साल में एक बार बाढ़ से डूबने वाले इलाके को “चेतावनी क्षेत्र” (वार्निंग जोन) कहा गया है।

2016 के आदेश के तहत अपवादों को छोड़कर, गंगा, उसके किनारों, उसकी सहायक नदियों तथा सक्रिय बाढ़ क्षेत्र में आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक या अन्य उद्देश्यों के लिए स्थायी या अस्थायी निर्माण पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। 2026 का संशोधन इस प्रविधान में कोई बदलाव नहीं करता।

हालांकि, अधिसूचना में नए तय किए गए नियामक क्षेत्र और चेतावनी क्षेत्र में निर्माण की अनुमति या प्रतिबंध के बारे में कुछ भी साफ तौर पर नहीं बताया गया है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

 

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