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राम मंदिर ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के लिए मंगलवार से इंटरव्यू शुरू हो गए.
एक उच्चस्तरीय पैनल ने 5,200 आवेदनों में से चुने गए 18 उम्मीदवारों में से अब तक आठ का इंटरव्यू लिया.
40 से 50 मिनट तक चले इंटरव्यू में धार्मिक कार्यों के अनुभव, भगवान राम में आस्था और हिंदू धर्म की मूल धार्मिक परंपराओं से जुड़े सवाल पूछे गए.
इंटरव्यू के दौरान यह भी पूछा गया कि क्या उम्मीदवार चोटी रखते हैं, जनेऊ पहनते हैं, शुद्ध शाकाहारी हैं या मांसाहारी, शराब का सेवन करते हैं या नहीं, कट्टर हिंदू हैं या केवल आस्थावान, क्या वे हिंदू धर्म के अनुरूप वस्त्र पहनने में सहज होंगे और अन्य धर्मों के बारे में उनकी क्या राय है.
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोप सामने आने के बाद ट्रस्ट ने पूर्णकालिक सीईओ नियुक्त करने का फ़ैसला लिया था. सूत्रों के अनुसार, सीईओ पद के लिए साक्षात्कार अगले चार दिनों तक जारी रहेंगे, जबकि पहले तय किया गया था कि प्रक्रिया दो दिनों में पूरी कर ली जाएगी.
सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को साक्षात्कार के पहले दिन आठ उम्मीदवारों का साक्षात्कार लिया गया जिनमें तीन पूर्व आईएएस, एक पूर्व आईपीएस और चार पूर्व सैन्य अधिकारियों का साक्षात्कार हुआ.
आवेदकों में पूर्व नौकरशाह
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बुधवार को दूसरे दिन एक ब्रिगेडियर रैंक के सेवानिवृत्त अधिकारी साक्षात्कार के लिए पहुंचे, जिनके उत्तर प्रदेश से होने की बात कही गई.
इसके अलावा तीन अन्य पूर्व नौकरशाहों का भी साक्षात्कार लिया गया. ये सभी उत्तर प्रदेश कैडर से नहीं थे.
पूर्व आईपीएस राजेश पांडेय और पूर्व आईएएस दिनेश चंद्र भी अन्य उम्मीदवारों के साथ साक्षात्कार में शामिल थे.
राजेश पांडेय उत्तर प्रदेश कैडर के 2005 बैच के आईपीएस अधिकारी (प्रांतीय पुलिस सेवा से पदोन्नत) पुलिस महानिरीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए.
उन्होंने उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वाड, स्पेशल टास्क फ़ोर्स और फ़ैज़ाबाद/अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के रूप में सेवा दी.
उनके कार्यकाल में ही कुख्यात गैंगस्टर श्रीप्रकाश शुक्ला के साथ मुठभेड़ का मामला सामने आया था.
राजेश पांडे का दूसरे दिन भी इंटरव्यू हुआ. इसके अलावा बिहार के डीजीपी प्रवेश सक्सेना का भी बुधवार को इंटरव्यू हुआ.
प्रवेश सक्सेना बिहार के वर्तमान पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) हैं.
दिनेश चंद्र उत्तर प्रदेश कैडर के 2012 बैच के आईएएस अधिकारी (प्रांतीय सिविल सेवा से पदोन्नत) विशेष सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए.
उन्होंने जौनपुर, बहराइच, कानपुर देहात और सहारनपुर के ज़िलाधिकारी के रूप में कार्य किया और उन्हें द इंडियन एक्सप्रेस एक्सीलेंज इन गवर्नेंस पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
सूत्रों ने बताया कि 40 से 50 मिनट तक चले साक्षात्कारों में धार्मिक कार्यों के अनुभव, भगवान राम में आस्था और हिंदू धर्म की अन्य धार्मिक परंपराओं से जुड़े सवाल पूछे गए.
उम्मीदवारों से यह भी पूछा गया कि क्या वे चोटी रखते हैं, जनेऊ पहनते हैं, शुद्ध शाकाहारी हैं या मांसाहारी, शराब का सेवन करते हैं या नहीं, कट्टर हिंदू हैं या केवल आस्थावान और क्या वे हिंदू धर्म के अनुरूप वस्त्र पहनने में सहज होंगे.
सूत्रों ने बताया कि उम्मीदवारों से उनकी नेतृत्व क्षमता, धार्मिक और सामाजिक सहभागिता, राम मंदिर के लिए उनकी दृष्टि और कार्ययोजना के बारे में भी सवाल पूछे गए.
सभी साक्षात्कार राम मंदिर परिसर स्थित ग्रीन हाउस में हुए.
कब, कहां और कौन लोग ले रहे इंटरव्यू
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सूत्रों के अनुसार, सभी 18 उम्मीदवार सोमवार देर रात अयोध्या पहुंचे और ट्रस्ट की ओर से सुझाए गए विभिन्न स्थानों पर ठहरे. पूरी साक्षात्कार प्रक्रिया बंद कमरे में की गई.
ट्रस्ट सूत्रों ने बताया कि उम्मीदवार सुबह करीब 9 बजे राम मंदिर परिसर पहुंचे और साक्षात्कार प्रक्रिया सुबह 10 बजे शुरू हुई. साक्षात्कार शुरू होने से पहले सभी उम्मीदवारों को पूरे राम मंदिर परिसर का भ्रमण कराया गया.
ट्रस्ट सूत्रों ने बताया, “हर उम्मीदवार ने अयोध्या एयरपोर्ट पर पहुंचने का अपना कार्यक्रम पहले ही ट्रस्ट को भेज दिया था. ट्रस्ट ने उन्हें एयरपोर्ट से रिसीव किया. वहां से अलग-अलग वाहनों में अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया.”
उन्होंने आगे कहा, “साक्षात्कार राम मंदिर परिसर में ही लिए जा रहे हैं और उम्मीदवारों को मीडिया से बातचीत न करने के निर्देश दिए गए हैं.”
उन्होंने यह भी कहा, “साक्षात्कार प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी उम्मीदवारों को वापस अयोध्या एयरपोर्ट ले जाया जाएगा, जहां से वे नई दिल्ली के लिए उड़ान भरेंगे. दिल्ली से वे अपने-अपने गंतव्य के लिए उड़ान लेंगे.”
सूत्रों के अनुसार, 18 उम्मीदवारों में पूर्व नौकरशाहों के साथ दक्षिण भारत के मंदिरों में वरिष्ठ पदों पर रह चुके लोग भी शामिल हैं.
तीन सदस्यीय चयन समिति स्क्रीनिंग के लिए सोमवार रात अयोध्या पहुंची.
18 उम्मीदवारों में से समिति तीन नामों का चयन करेगी, जिन पर अंतिम फ़ैसला ट्रस्ट करेगा.
पैनल में पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हवारे शामिल हैं.
पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को नहीं आया बुलावा

पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर, जिन्हें इस पद के लिए अपने आवेदन पर कोई जवाब नहीं मिला, उन्होंने चयन प्रक्रिया और मानदंडों में पारदर्शिता की मांग की और ट्रस्ट से शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक करने को कहा.
ठाकुर ने कहा, “आज मैंने अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट को एक पत्र भेजा है. मैंने ट्रस्ट के सीईओ पद के लिए आवेदन किया था, लेकिन आज तक कोई जानकारी नहीं मिली. मीडिया रिपोर्टों से पता चला कि लगभग 5,200 आवेदनों में से 18 लोगों को अयोध्या में साक्षात्कार के लिए बुलाया गया. मुझे साक्षात्कार के लिए न बुलाए जाने की कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं है, लेकिन इतने बड़े स्तर पर आवेदन आने के बाद ट्रस्ट को साक्षात्कार के लिए चुने गए उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक करने चाहिए.”
“इसके साथ ही शॉर्टलिस्टिंग के मानदंड भी बताए जाने चाहिए और आवेदकों को उनके चयन या अस्वीकृति की आधिकारिक सूचना दी जानी चाहिए. मेरा मानना है कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखी जानी चाहिए.”
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा पहले ही कह चुके हैं कि दुनिया की सबसे अधिक चर्चित मंदिर परियोजना में पेशेवर प्रशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूर्णकालिक सीईओ की नियुक्ति बेहद आवश्यक है.
ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि यह नियुक्ति पूरी तरह स्वायत्त होगी. सीईओ की शक्तियां ट्रस्ट तय करेगा और इसमें किसी सरकारी हस्तक्षेप की भूमिका नहीं होगी. सीईओ सीधे ट्रस्ट के महासचिव को रिपोर्ट करेगा.
ट्रस्ट के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सीईओ ट्रस्ट के मार्गदर्शन में दीर्घकालिक योजनाएं भी तैयार करेगा, ताकि ट्रस्ट डीड में निर्धारित उद्देश्यों को पूरा किया जा सके.
ट्रस्ट के सीईओ के रूप में नियुक्त व्यक्ति संगठन की सभी वैधानिक, प्रशासनिक और वित्तीय ज़िम्मेदारियां निभाएगा.
ट्रस्ट के अनुसार, सीईओ की जिम्मेदारी होगी कि वह संगठन की प्रकृति और आकार के अनुरूप व्यवस्थाएं, प्रक्रियाएं और संचालन संबंधी कार्यप्रणालियां विकसित करे और संस्था के उद्देश्यों, प्रकृति और आकार के अनुसार संगठनात्मक ढांचे को मजबूत और विकसित करे.
अन्य ज़िम्मेदारियों में सीईओ संगठन के अधिकारियों, पदाधिकारियों, कर्मचारियों और स्टाफ़ के लिए सर्वोच्च कार्यकारी प्राधिकारी के रूप में कार्य करेगा.
सीईओ ट्रस्ट की वर्तमान गतिविधियों और भविष्य के विकास के प्रभावी मैनेजमेंट को सुनिश्चित करेगा और सभी वैधानिक, रेगुलेटरी और ट्रस्ट डीड से संबंधित ज़रूरतों का पालन सुनिश्चित करेगा.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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