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केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ राहुल गांधी ने खोला मोर्चा, बुंदेलखंड के लिए क्यों अहम?

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Aug 19, 2026


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत सरकार की निकोबार परियोजना के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करने के बाद अब कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश को जल और बिजली के क्षेत्र में संकट से बचाने के लिए प्रस्तावित केन-बेतवा नदी-लिंकिंग परियोजना के खिलाफ अपना मोर्चा खोल दिया है। राहुल ने कहा कि वह दो नदियों को जोड़ने वाली इस परियोजना के खिलाफ सत्याग्रह कर रहे आदिवासियों को समर्थन समर्थन देते हैं।

राहुल गांधी ने मोर्चा खोला

लोकसभा में विपक्ष के नेता ने बुधवार को एक्स पर केन-बेतवा नदी-लिंकिंग परियोजना से प्रभावित आदिवासियों के एक समूह के साथ अपनी हालिया बैठक का वीडियो साझा किया।

उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा, ‘केन-बेतवा परियोजना के खिलाफ सत्याग्रह कर रहे आदिवासी भाई-बहनों की समस्याएं, मांगें, संघर्ष और व्यक्तिगत कठिनाइयां हैं।

वर्षों से बुंदेलखंड के ये निवासी अपने अधिकारों के लिए अन्याय और उत्पीड़न सहन कर रहे हैं; उन्हें सम्मान और समर्थन मिलना चाहिए।’

उन्होंने कहा, ‘इस लड़ाई में, कांग्रेस और मैं अपने आदिवासी भाई-बहनों के साथ खड़े हैं।’ पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष कहा कि वह इस संघर्ष में उनके साथ हैं और सरकार पर दबाव डालने के लिए स्थल का दौरा करेंगे।

11,500 एकड़ भूमि गंवाने का दावा

वीडियो में एक आदिवासी प्रतिनिधि यह दावा करते हुए सुना जा सकता है कि यह परियोजना 21 आदिवासी-प्रधान गांवों को प्रभावित करेगी और लगभग 46 लाख पेड़ों के साथ-साथ मध्यप्रदेश स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व पर भी असर डालेगी। प्रतिनिधि के अनुसार, लगभग 7,000 परिवारों की 11,500 एकड़ भूमि इस परियोजना के कारण खो जाएगी।

उन्होंने राहुल गांधी से संसद में प्रशासन के कथित उत्पीड़न के मुद्दे को उठाने और आंदोलन में शामिल होने का आग्रह किया। वीडियो में राहुल गांधी ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह स्थल का दौरा करेंगे और सरकार पर दबाव डालेंगे।

पहली नदी लिंक परियोजना के यूपी-एमपी को फायदे

44,605 करोड़ रुपये की केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की पहली नदी-लिंकिंग परियोजना है। इस परियोजना के तहत मध्य प्रदेश में केन नदी के अतिरिक्त जल को उत्तर प्रदेश की जलसंकट वाली बेतवा नदी को भेजा जाएगा ताकि बुंदेलखंड (एमपी व यूपी में फैले) क्षेत्र को सूखे से मुक्त कराया जा सके।

इसका उद्देश्य 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि की सालाना सिंचाई करना, करीब 62 लाख लोगों को पेयजल देना और मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में सूखा प्रभावित बुंदेलखंड क्षेत्र में 103 मेगावाट का जल विद्युत उत्पादन और 27 मेगावाट की सौर ऊर्जा का उत्पादन करना है।

इससे उत्तर प्रदेश के बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर को जबकि मध्य प्रदेश में पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दामोह, दातिया, विदिशा, शिवपुरी और रायसेन को काफी फायदा

 

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