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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्लाईदुबई के पायलट कैप्टन स्मित मच्छर से फोन पर बात कर उनके साहस और सूझबूझ की सराहना की.
पीएम मोदी ने कहा कि देशभर में उनकी लंबी उम्र और जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना हो रही है. उन्होंने कहा कि कैप्टन स्मित ने गंभीर चोटों के बावजूद यात्रियों की जान बचाने के लिए जो फ़ैसला लिया, उस पर पूरे देश को गर्व है.
प्रधानमंत्री ने कहा, “पूरा देश आपके लिए प्रार्थना कर रहा है. महामृत्युंजय का जाप सब जगह चल रहा है. आपकी हिम्मत, धैर्य और सूझबूझ ने इतने लोगों की जान बचाई. आपने दिखाया कि भारतीय “जान लेने वाले नहीं, जान बचाने वाले लोग हैं.
पीएम मोदी ने कहा कि कैप्टन स्मित स्वयं गंभीर रूप से घायल थे और जीवन-मृत्यु की लड़ाई लड़ रहे थे, लेकिन उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी. उन्होंने कहा कि इस साहसिक क़दम से कैप्टन स्मित ने 140 करोड़ देशवासियों का मान बढ़ाया है.
कैप्टन स्मित ने सुनाई आपबीती
कैप्टन स्मित ने प्रधानमंत्री को बताया कि घटना के दौरान वह गिर चुके थे और उन्हें कई चोटें लगी थीं. इसके बावजूद उन्हें महसूस हो रहा था कि विमान के भीतर स्थिति बिगड़ रही है.
स्मित ने कहा, मुझे लगा कि अगर मैं नहीं उठा और कोई क़दम नहीं उठाया, तो हालात और ख़राब हो जाएंगे. मैं 17 साल से जहाज़ उड़ा रहा हूँ और पिछले 11 साल से कैप्टन हूँ. मुझे आँख बंद करके भी पता चलता है कि जहाज़ में क्या हो रहा है. जब मैं नीचे गिरा हुआ था, तब मुझे एहसास हो रहा था कि स्थिति ख़राब हो रही है.”
कैप्टन स्मित ने कहा कि उन्होंने अंतिम कोशिश करते हुए कॉकपिट का दरवाज़ा खोला, जिसके बाद अन्य लोग आ सके. उन्होंने कहा कि इस पूरी कोशिश में बाक़ी लोगों की भी अहम भूमिका थी.
उन्होंने कहा, “मैं अपनी जान बचाने के हिसाब से कर रहा था, लेकिन उसी समय मुझे पता था कि मैं उन लोगों को मरने नहीं दे सकता.”
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हनुमान चालीसा से मिला हौसला
प्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित भावुक हो गए. उन्होंने कहा कि वह दर्द के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ करते रहे और उन्हें भरोसा है कि भगवान ने ही उनकी जान बचाई.
उन्होंने कहा, “मैं बहुत पॉजिटिव हूँ. जब भी मुझे दर्द होता है, मुझे एक ही चीज़ आती है, मैं हनुमान चालीसा ही बोल रहा था. मुझे पता है कि भगवान ने ही मुझे बचाया है.”
कैप्टन स्मित ने कहा कि वह अपनी चोट को केवल घाव के रूप में नहीं देख रहे हैं, बल्कि इसे एक ऐसी यात्रा मान रहे हैं जिसमें धीरे-धीरे रिकवरी होगी. उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि वह फिर से पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगे.
उन्होंने यह भी बताया कि रोज़ सुबह पूजा के समय उनका दो वर्षीय बेटा उनकी गोद में बैठता है और वह उसे हनुमान चालीसा सुनाते हैं. कैप्टन स्मित ने कहा कि विदेश में रहने के बावजूद अपनी संस्कृति से दूर नहीं होना चाहिए.
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पीएम ने परिवार के धैर्य की सराहना की
प्रधानमंत्री ने कैप्टन स्मित के पिता भूपेंद्रभाई, माँ गीताबेन और पत्नी सोनलबेन से हुई अपनी बातचीत का उल्लेख किया. पीएम मोदी ने कहा कि गीताबेन ने स्मित को अच्छे संस्कार दिए हैं. उन्होंने सोनलबेन के साहस और संयम की भी प्रशंसा की.
प्रधानमंत्री ने कहा कि सावरकुंडला समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में कैप्टन स्मित की लंबी उम्र और बेहतर स्वास्थ्य के लिए पूजा-अर्चना हो रही है. उन्होंने कहा कि पूरा भारत कैप्टन स्मित के स्वस्थ होकर लौटने का इंतज़ार कर रहा है.
पीएम मोदी ने सऊदी अरब और यूएई की सरकारों का भी कैप्टन स्मित की देखभाल और इलाज के लिए आभार जताया. उन्होंने कहा कि ज़रूरत पड़ने पर वह सिर्फ़ एक फोन कॉल की दूरी पर हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा, “आपने सचमुच भारत का नाम बचाया है. आप पूरी तरह स्वस्थ हो जाइए, पूरा देश आपके साथ है.” बातचीत के अंत में प्रधानमंत्री ने कैप्टन स्मित से कहा कि वह जल्द स्वस्थ हों, फिर दोनों मिलकर बाकी बातें करेंगे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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