जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। केरलम चुनाव में कांग्रेस को जितनी बड़ी जीत मिली है कुछ उतनी ही मशक्कत पार्टी को मुख्यमंत्री का चेहरा तय करने में करनी पड़ रही है। मुख्यमंत्री पद के तीन प्रमुख दावेदारों के बीच अब अंतिम रेस कांग्रेस के ताकतवर संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल तथा केरलममें विपक्ष के नेता रहे वीडी सतीशन के बीच रह गई है।
कांग्रेस की दीर्घकालिक राजनीति और केरलममें संगठन की मजबूती बनाए रखने की कसौटी के आधार पर पार्टी हाईकमान मुख्यमंत्री के नाम का फैसला करेगा।
सत्ता और संगठन के बीच समन्वय की इस जरूरत को देखते हुए संकेत हैं कि कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी तथा एके एंटनी जैसे अनुभवी दिग्गजों से विचार मंथन के बाद ही अब मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा और इसमें एक-दो दिन का समय लग सकता है।
मुख्यमंत्री पद के तीन प्रमुख दावेदार
केरलम में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने शनिवार को मुख्यमंत्री पद के तीनों प्रमुख दावेदारों वेणुगोपाल, सतीशन और पूर्व में केरलम में नेता विपक्ष रहे रमेश चेन्निथेला संग लंबी बातचीत की।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की बुलाई इस बैठक में लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, केरलमकी प्रभारी पार्टी महासचिव दीपा दासमुंशी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सन्नी जोसेफ भी मौजूद थे। इस बैठक में मुख्यमंत्री के लिए किसी एक नाम पर निर्णय नहीं हो पाया।
विधायकों ने पार्टी हाईकमान को सौंपी जिम्मेदारी
बेशक, केरलम के नवनिर्वाचित कांग्रेस विधायकों ने प्रस्ताव पारित कर पार्टी हाईकमान को मुख्यमंत्री तय करने के लिए अधिकृत किया है। लेकिन कांग्रेस के 63 में से करीब 45 विधायकों की केसी वेणुगोपाल के पक्ष में लामबंदी ने हाईकमान की चुनौती बढ़ा दी है।
वेणुगोपाल को भले ही विधायक दल में अधिक समर्थन मिलता दिख रहा है मगर इसमें दो राय नहीं कि सतीशन केरलममें कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय नेता हैं और आइयूएमएल समेत यूडीएफ में शामिल अधिकांश सहयोगी दल सतीशन को मुख्यमंत्री बनाने की पैरोकारी कर रहे हैं।
आसान नहीं है किसी एक को चुनना
ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व के सामने विधायकों की राय तथा केरलम में पार्टी के सबसे प्रभावी चेहरे सतीशन के बीच किसी एक को चुनने का फैसला लेना सहज नहीं है। खासकर यह देखते हुए कि राज्यों में कांग्रेस का नेतृत्व कमजोर होने के कारण उसकी प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय सियासत में भागीदारी कमजोर हुई है और केरलम जैसे चुनिंदा राज्य ही हैं जहां पार्टी के पास संगठन और चेहरा दोनों हैं।
ऐसे में नेतृत्व के सामने चुनौती यह भी है कि विधायकों की राय के आधार पर वेणुगोपाल को सीएम बनाने का फैसला लिया जाता है तो यह संदेश जाएगा कि उन्हें ऊपर से थोपा गया है।
राहुल गांधी के करीबी हैं वेणुगोपाल
वेणुगोपाल के मामले में तो यह बात विशेष रूप से लागू होती है क्योंकि वे पार्टी के संगठन महासचिव के तौर पर कांग्रेस नेतृत्व खासकर राहुल गांधी के काफी करीबी माने जाते हैं। ऐसे में सत्ता और संगठन से जुड़े इन सभी पहलुओं पर गहन विचार मंथन का दौर लंबा चलना स्वाभाविक है।
सोनिया गांधी से राय लेगी कांग्रेस
समझा जाता है कि इससे जुड़ी सियासी संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए ही पार्टी नेतृत्व ने मुख्यमंत्री का नाम तय करने के लिए अब सोनिया गांधी की राय लेने का निर्णय लिया है। साथ ही पूर्व रक्षामंत्री केरलम में पार्टी के सबसे अनुभवी नेता एके एंटनी से भी सलाह-मशविरा किया जाएगा और इसलिए माना जा रहा कि केरलम के सीएम का नाम तय करने में कांग्रेस को अभी एक-दो दिन का और समय लगेगा।