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ख़ानाबदोश ज़िंदगी: क्रिमिनल ट्राइब्स का ‘कलंक’ हटे 74 साल हुए पर इज़्ज़त के लिए जंग अब भी जारी

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Sep 12, 2026


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इमेज स्रोत, Sudharak Olwe

इमेज कैप्शन, अंग्रेज़ों के दौर में बने कुछ कानूनों के तहत कई भारतीय समुदायों को ‘जन्मजात अपराधी’ माना गया था. (सांकेतिक तस्वीर)

15 अगस्त 2027 को भारत की आज़ादी के 80 साल पूरे हो जाएंगे. हालांकि, भारत में कुछ समुदायों की आज़ादी का इतिहास अलग है.

जब देश आज़ाद हुआ, संविधान लागू हुआ और नागरिकों को मौलिक अधिकार दिए गए तब भी कुछ लोग इन सबसे वंचित रहे.

लेकिन अंग्रेज़ों के क़ानून के तहत ‘जन्मजात अपराधी’ क़रार दी गई ख़ानाबदोश जनजातियों को इस कलंक से छुटकारा पाने के लिए पांच साल इंतज़ार करना पड़ा था.

31 अगस्त 1952 को क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट, 1871 को रद्द कर दिया गया और इन समुदायों को ‘आज़ाद’ (लिबरेटेड) घोषित किया गया.

इसलिए, 31 अगस्त 2027 को इस ऐतिहासिक घटना के 75 साल पूरे हो जाएंगे. हालांकि, सवाल अब भी बना हुआ है, क्या वे जनजातियां, जिन्हें कानून ने ‘आज़ाद’ कर दिया था, वास्तव में सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और मानसिक रूप से मुक्त हो पाई हैं?

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