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ख़ुदकुशी के आंकड़ों में शादीशुदा लोगों की संख्या क्यों बढ़ा रही है चिंता?

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May 31, 2026


आत्महत्या के कुल मामलों में पुरुष ज्यादा हैं लेकिन एक्सपर्ट मानते हैं कि महिलाओं की मानसिक पीड़ा अलग तरह से दिखती है. (प्रतीकात्मक फोटो)

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इमेज कैप्शन, आत्महत्या के कुल मामलों में पुरुष ज़्यादा हैं लेकिन एक्सपर्ट मानते हैं कि महिलाओं की मानसिक पीड़ा अलग तरह से दिखती है. (प्रतीकात्मक फ़ोटो)

शादी को लंबे समय से सामाजिक और पारिवारिक स्थिरता से जोड़ा जाता रहा. लेकिन हाल के आंकड़े बताते हैं कि इसी स्थिरता को पाने का दबाव अब कई लोगों के लिए मानसिक तनाव की वजह भी बन रहा है.

यहां तक कि कुछ मामलों में लोग आत्महत्या जैसे क़दम उठाने को मजबूर हो रहे हैं. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट में इसका ज़िक्र है.

साल 2024 में दर्ज 1.70 लाख से ज़्यादा आत्महत्या के मामलों में एक-तिहाई से अधिक मामलों के पीछे यही कारण दर्ज किया गया. इसके बाद लंबी या गंभीर बीमारी, ड्रग एडिक्शन और शादी से जुड़े तनाव जैसी वजहें सामने आईं.

(आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुज़र रहे हैं तो भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.)

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