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खेती में आएगी नई क्रांति: न्यूजीलैंड की मॉडर्न तकनीक से लैस होंगे किसान, उत्पादन बढ़ाने में मिलेगी मदद

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Apr 26, 2026


जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सोमवार को भारत और न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं। व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर की औपचारिकता नई दिल्ली के भारत मंडपम में पूरी की जाएगी।

वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल व न्यूजीलैंड के व्यापार व निवेश मंत्री टोड मैक्ले व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। गत दिसंबर में दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर सैद्धांतिक मंजूरी दी गई थी।

व्यापार समझौते से दोनों देशों के बीच होने वाले व्यापार को अगले पांच साल में पांच अरब डॉलर तक ले जाने में मदद मिलेगी। अभी दोनों देशों के बीच 2.5 अरब डॉलर का व्यापार होता है।

वस्तु व सेवा सेक्टर में व्यापार बढ़ोतरी के साथ न्यूजीलैंड भारत में 20 अरब डालर का निवेश भी करेगा। व्यापार समझौते के तहत न्यूजीलैंड भारतीय कामगारों को भी अपने यहां विभिन्न सेक्टर में काम करने का मौका देगा।

भारतीय युवा घूमने जाने के दौरान वहां एक साल के लिए काम भी कर सकेंगे। न्यूजीलैड हर साल म्युजिक, योगा, खाना बनाने कला जैसी जानकारी रखने वाले 1000 भारतीय युवाओं को साल भर के लिए वीजा देगा।

न्यूजीलैंड पढ़ने जाने वाले सभी छात्र सप्ताह में 20 घंटे वहां काम भी कर सकेंगे। अभी न्यूजीलैंड में तीन लाख भारतीय रहते हैं। विज्ञान, अंग्रेजी, टेक्नोलाजी व गणित विषय से ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले छात्रों को दो से तीन साल तक वर्क वीजा मिलेगा।

न्यूजीलैंड ने भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए अलग से हर साल 5000 वीजा का कोटा निर्धारित किया है। इस कोटे के तहत जाने वाले प्रोफेशनल्स तीन साल तक वहां काम कर सकेंगे।

इस कोटे से जाने वाले प्रोफेशनल्स वापस आ जाते हैं तो उनकी जगह कोई अन्य प्रोफेशनल्स न्यूजीलैंड जा सकेगा। आईटी, हेल्थ सेक्टर, शिक्षा, निर्माण, टूरिज्म से जुड़े प्रोफेशनल्स को इसका विशेष लाभ मिलेगा।

किसान को सेब व किवी का उत्पादन बढ़ाने में मिलेगी मदद

न्यूजीलैंड भारत में सेब, किवी व मनुका मधु का उत्पादन बढ़ाने में भी मदद करेगा। व्यापर समझौते के तहत न्यूजीलैंड इन आइटम के साथ भारत के डेयरी सेक्टर की उत्पादकता बढ़ाने में अपनी टेक्नोलाजी से सहयोग करेगा।

भारत में सेब का प्रति हेक्टेयर उत्पादन 9.2 टन है जबकि न्यूजीलैंड में प्रति हेक्टेयर उत्पादन 53.6 टन का है। भारत में एक हेक्टेयर में 3.05 टन जबकि न्यूजीलैंड में इतने ही एरिया में 47 टन किवी का उत्पादन होता है।

टेक्नोलाजी लेने के लिए भारत ने इन आइटम के शुल्क में न्यूजीलैंड को बड़ी राहत दी है। एक निश्चित मात्रा में ही न्यूजीलैंड कम शुल्क पर सेब व किवी भारत के बाजार में भेज सकेगा।

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